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दिल्ली-देहरादून ग्रीन फील्ड इकोनॉमिक कॉरिडोर: बरसात के बाद शुरु हो सकता है निर्माण

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25 किमी भूमि क्षेत्र में से निर्माण एजेंसी का 21 किमी भूमि पर कब्जा
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22 गांवों की 21 हजार 574.28 हेक्टेयर भूमि पर लिया जाना है कब्जा
फोटो समाचार
संवाद न्यूज एजेंसी
शामली। दिल्ली-देहरादून ग्रीन फील्ड इकोनॉमिक कॉरिडोर का निर्माण कार्य बरसात के बाद शुरू होने की संभावना है। शामली जिले 22 गांवों में से कुल 25 किमी भूमि क्षेत्र में करीब 21 किमी भूमि यानी 81.64 प्रतिशत पर जिला प्रशासन ने चंडीगढ़ की निर्माण एजेंसी को कब्जा दे दिया है। शेष भूमि पर भी जल्द ही कब्जा मिलने की उम्मीद है।
छह लेन का दिल्ली-देहरादून ग्रीन फील्ड इकोनॉमिक कॉरिडोर बागपत के ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे से शुरू होकर बागपत, मुजफ्फरनगर, शामली और सहारनपुर जिलों से होता हुआ गणेशपुर चौक से सीधा देहरादून उत्तराखंड तक जाएगा। चार चरणों में इसका निर्माण होना है। बागपत जिले के ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे से लेकर लोहड्डा तक प्रथम चरण, लोहड्डा गांव से लेकर मुजफ्फरनगर जिले के करौदा महाजन गांव तक दूसरा चरण, शामली के लिसाढ-लांक से लेकर थानाभवन ब्लॉक के ख्यावड़ी गांव तक तीसरा चरण, ख्यावड़ी से सहारनपुर जिले के गणेशपुर चौक बाईपास तक चौथा चरण प्रस्तावित है।
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शामली जिले में दिल्ली-देहरादून ग्रीन फील्ड इकोनॉमिक कॉरिडोर एक्सप्रेसवे की 22 गांवों की करीब 21 हजार 574.28 हेक्टेयर भूमि शामिल है। 25 किमी भूमि क्षेत्र में से करीब 21 किमी पर निर्माण एजेंसी को कब्जा मिल चुका है। शामली नायब तहसीलदार प्रशांत अवस्थी का कहना है कि करीब 21 किमी पर कब्जा हो चुका है। गांव लांक में चकबंदी प्रकिया जारी है। एक सप्ताह में रिकॉर्ड दुरुस्त कर जिला प्रशासन भूमि पर कब्जा दिला देगा। एक किमी भूमि पर किसानों का विवाद होने के चलते कब्जा नहीं मिल पाया है।
285 करोड़ मुआवजा बांटा
एसडीएम सदर विशु राजा ने बताया कि दिल्ली-देहरादून ग्रीन फील्ड इकोनॉमिक कॉरिडोर एक्सप्रेसवे के 22 गांवों के किसानों को 285 करोड़ मुआवजा वितरित किया जा चुका है। 115 करोड़ रुपये का मुआवजा वितरित होना शेष है। जल्द ही किसानों को मुआवजा वितरित करके बाकी भूमि पर कब्जा लेने का कार्य पूरा कर लिया जाएगा। निर्माण एजेंसी के एजीएम दीपक राणा व नवीन पाड़ियार ने बताया कि भूमि पर कब्जा मिलने पर बरसात खत्म होने के बाद निर्माण शुरू हो जाएगा।
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अतिरिक्त अवार्ड का पेच फंसा
दिल्ली-देहरादून ग्रीन फील्ड इकोनॉमिक कॉरिडोर एक्सप्रेसवे के 22 गांवों की किसान संघर्ष समिति के सचिव विदेश मलिक का कहना है कि अतिरिक्त भूमि का अवार्ड मंजूर होने तथा मुआवजा न मिलने तक किसान अपनी भूमि पर कब्जा नहीं होने देंगे। राजस्व टीम एक्सप्रेसवे की कुल भूमि की पैमाइश कर अतिरिक्त अवार्ड बनाकर एनएचएआई की बागपत इकाई को भेज चुकी है। जिला प्रशासन के अतिरिक्त अवार्ड को नामंजूर करते हुए सर्वेयर टीम से अतिरिक्त अवार्ड बनवा रही है। जिसकी बाबरी गांव में पैमाइश चल रही है। इसके बाद अतिरिक्त अवार्ड एनएचएआई बनवाएगी।
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