- गोबर बेचकर, ग्राम पंचायत के खाते में जमा नहीं कराया पैसा
- जनपद में हैं 24 गोशालाएं, एक ट्रॉली गोबर 1500 रुपये में बेचा जा रहा
संवाद न्यूज एजेंसी
शामली। जिले की गोशालाओं में हर माह लाखों रुपये का गोबर घोटाला किया जा रहा है। प्रत्येक गोशाला से रोजाना एक ट्राॅली गोबर करीब 1500 रुपये में बेचकर पैसा ग्राम पंचायत के खाते में जमा नहीं कराया गया। जिले में 24 गोशाला हैं, ऐसे में प्रति माह 10.80 लाख का गोबर बेचा जा रहा है।
सभी जनपदों में करोड़ों के बजट से गोशाला का निर्माण कराया है। गोशाला के रखरखाव की जिम्मेदारी प्रधान व सचिवों को सौंपी गई थी। सरकार एक पशु का 62 रुपये के हिसाब से बजट जारी करती है। बजट में पशुओं का चारा, उनका रखरखाव, मजदूरों का मानदेय आदि शामिल है। नियमानुसार गोशाला से गोबर बेचकर धनराशि ग्राम पंचायत के खाते में जमा करानी चाहिए। लेकिन यहां गोबर किसानों को नकद बेचा जा रहा है। जिसका उपयोग किसान अपने खेतों में खाद व वर्मी कंपोस्ट आदि के लिए कर रहे हैं।
गोबर की एक ट्राॅली की कीमत 1500 रुपये की वसूली जा रही है। जनपद में 24 गोशाला में चार हजार से अधिक गोवंश है, जिनका गोबर एकत्र कर किसानों को बेच दिया जाता है। ग्राम प्रधान, सचिव, बीडीओ, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी, डीपीआरओ, डीडीओ व सीडीओ को भी नहीं पता है कि गोबर का पैसा कहां जा रहा है। तीन वर्ष पूर्व गोशालाओं की स्थापना से यह घोटाला चल रहा। इस दौरान बेचे गए गोबर का कोई हिसाब नहीं है।
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गोशाला से यदि गोबर बेचकर पैसा ग्राम पंचायत के खाते में जमा नहीं कराया जा रहा है तो यह मामला गंभीर है। मामले की जांच कराएंगे। गोबर का पैसा सिर्फ गोशाला में खर्च किया जाना चाहिए। इसका हिसाब गोशाला समिति से मांगा जाएगा, दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होगी। - शंभूनाथ तिवारी सीडीओ शामली
मामला जानकारी में आया है। समिति को गोबर का पैसा गोशाला पर खर्च करने के लिए कहा गया है। जब समिति से बात हुई तो उन्होंने बताया कि वह मजदूरों व अन्य व्यवस्थाओं पर गोबर का पैसा खर्च करते हैं। गोबर की ट्राली की कीमत पर 1500 रुपये रखी गई है। - यशवंत सिंह, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी, शामली।