अंधविश्वास के चलते एक घंटे तक मिट्टी में दबाए शव
शामली/ बाबरी। विक्रांत और विनय को बाबरी के चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया, लेकिन इसके बाद भी परिजनों को विश्वास नहीं हुआ। बाद में कुछ ग्रामीणों के कहने पर परिजनों ने दोनों के शव करीब एक घंटे तक मिट्टी में भी दबाए। बाद में अंतिम संस्कार किया गया।
करंट लगने से बेहोश हुए दोनों मासूम बच्चों को परिजन उन्हें सबसे पहले बाबरी के अस्पताल लेकर पहुंचे। यहां चिकित्सकों ने दोनों को मृत घोषित कर दिया। लेकिन परिजनों को चिकित्सकों की बात पर यकीन नहीं हुआ। इसके बाद परिजन उन्हें लेकर शामली के अस्पताल पहुंचे। यहां भी चिकित्सकों ने वही बात दोहराई। जिस पर परिजनों में कोहराम मच गया। इसके बाद परिजन दोनों के शव लेकर घर पहुंचे। यहां किसी ग्रामीण ने परिजनों को कहा कि बिजली करंट से मौत होने के बाद अगर मिट्टी में गड्ढा खोदकर शव को दबा दिया जाए तो दोनों बच्चे जीवित हो सकते हैं। जिस पर विश्वास करते हुए परिजनों ने मकान के पास खाली पड़े प्लाट में दो गड्डे खोद दिए और उसमें शवों को दबा दिया। करीब एक घंटे बाद अन्य ग्रामीणों ने परिजनों को समझाया और शवों का अंतिम संस्कार करने की बात कही। जिसके बाद शवों को बाहर निकाल कर श्मशान भूमि पर शवों को दफनाया गया ।
परिजनों का रो-रोकर हुआ बुरा हाल
विक्रांत और विनय दोनों ही गांव के प्राथमिक विद्यालय में पढ़ते थे। दोनों ही कक्षा-एक के छात्र थे। विक्रांत की एक बड़ी बहन गोधो आठ वर्षीय व एक छोटा भाई कार्तिक है। वहीं विपिन की एक बड़ी बहन विध्या आठ वर्षीय व छोटा भाई अभय चार वर्षीय व सबसे छोटी बहन राशि छह माह की है। दोनों बच्चों की मौत से परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। परिजनों को आश्वासन देने के लिए काफी संख्या में ग्रामीण पहुंचे। परिजनों को रोते देख ग्रामीणों की आंखे भी नम हो गई।