शामली। जिले में कुत्तों व बंदरों के हमले में घायल लोग रोजाना अस्पताल में पहुंच रहे हैं। जिला अस्पताल से लेकर शामली, कैराना, ऊन, थानाभवन सीएचसी पर हर माह दो हजार से अधिक मरीज एंटी रेबीज का इंजेक्शन लगवाने पहुंचते हैं। जिनमें सबसे अधिक 800 मरीज जिला अस्पताल में पहुंच रहे हैं। चिकित्सक सावधानी बरतने की सलाह दे रहे हैं।
28 सितंबर को हर साल विश्व रेबीज दिवस के रूप में मनाया जाता है। इसका उद्देश्य लोगों को रेबीज के संक्रमण और इससे बचाव के प्रति जागरूक करना होता है। रेबीज कुत्ते व बंदर के काटने से होता है। अगर किसी व्यक्ति को रेबीज हो जाता है, तो वह जानलेवा हो सकता है। सरकारी अस्पतालों में एंटी रेबीज का इंजेक्शन निशुल्क लगाया जाता है। सरकारी अस्पतालाें में रोजाना कुत्ते व बंदर के काटने के मरीज पहुंच रहे हैं।
जिला अस्पताल के सीएमएस डाॅ. किशोर आहूजा का कहना है कि कुत्ते व बंदर से लोगों को सतर्क रहना चाहिए और सावधानी बरतनी चाहिए।
रेबीज संक्रमण के लक्षण :
- चमक व रोशनी से दूर भागना।
- सांस लेने में हांफने की आवाज के साथ एलाइजा बाहर आना।
- गर्मी में असहज महसूस करना।
- तेज बुखार, सिर दर्द, चक्कर आना और शरीर में कमजोरी आना।
-कुत्ते व बंदर के काटने पर ये करें
- काटे गए घाव पर डिटर्जेंट साबुन के पानी से 15 मिनट तक धोएं।
- घाव को पानी से धोने के बाद एंटी सेप्टिक क्रीम, लोशन, डेटाल व स्प्रिट आदि लगाएं।
- घाव को खुला रखें।
- ज्यादा रक्त बहने पर साफ पट्टी बांधे।
- संक्रमण से बचाव के लिए एंटी रेबीज का इंजेक्शन लगवाएं।
- हर रोज चार पशुओं को भी बना रहे शिकार
कुत्ते हर रोज चार से पांच पशुओं को भी शिकार बना रहे हैं। पशु अस्पतालों में उपचार के लिए लोग पशुओं को लेकर पहुंच रहे हैं। सीवीओ डॉ. चंद्रभानु कश्यप ने बताया कि सभी अस्पतालों में बचाव के लिए उपचार की सुविधा उपलब्ध है। पिछले कुछ समय से कुत्तों के पशुओं को काटने के मामले बढ़े हैं।