शामली। रंगदारी, हत्या और फिर पलायन। कैराना के व्यापारियों के लिए अब ये आम बात हो गई है। कैराना में जिन व्यापारियों से रंगदारी मांगी गई, पैसा न देने पर या तो उनकी हत्या कर दी गई और या फिर उसे पलायन करना पड़ा। प्रदेश में सरकार बदल गई, लेकिन आज भी कैराना में दहशत व्याप्त है। व्यापारी बंदूकों के साये में व्यापार को मजबूर हैं।
कैराना में हालात 2013 के बाद ज्यादा खराब हुए। 2013 में कैराना में बदमाश फुरकान ने किराना व्यापारी विनोद सिंघल से रंगदारी मांगी। इसी दौरान कैराना में लाला अभय, आत्माराम, शिवकुमार और राजेंद्र से भी रंगदारी मांगी गई। तत्कालीन सीओ सीपी सिंह ने सभी व्यापारी के घरों पर फोर्स तैनात कर दी।
मामला शांत हुआ तो पुलिसकर्मी हटा लिए गए। जिसके बाद 2013 में ही रंगदारी नहीं देने पर व्यापारी विनोद की दुकान पर गोलियों से भूनकर भरे-बाजार हत्या कर दी गई थी। इसमें फुरकान का नाम सामने आया। कुछ दिन बाद ही अपनी दुकान पर बैठे सरिया व्यापारी राजेंद्र और शिवकुमार की गोलियों से भूनकर मुकीम गैंग ने मौत के घाट उतार दिया।
भाजपा ने सपा सरकार पर कानून व्यवस्था लचर होने का आरोप लगाते हुए जमकर हंगामा किया। पुलिस ने मुकीम गैंग, फुरकान को तो पकड़कर जेल भेज दिया, लेकिन रंगदारी की दहशत व्यापारियों में बरकरार रही। कुछ दिनों बाद ही फुरकान भी जमानत पर बाहर आ गया और सितंबर 2016 में राजकुमार सिंघल व्यापारी से रंगदारी मांगी गई। पुलिस ने वहां पर फोर्स तैनात कर दी।
2017 में विधानसभा चुनाव हुए और अब सूबे में भाजपा सरकार बन गई। भाजपा सरकार में ही आठ दिन पूर्व फुरकान ने दूसरे व्यापारी रामअवतार वर्मा से स्वयं आकर रंगदारी मांगी। जिसके बाद कैराना के अन्य व्यापारियों की चौकसी बढ़ा दी गई, अब व्यापारियों की दुकानों पर फोर्स तैनात है। सरकार बदल गई, लेकिन कैराना के हालात नहीं बदले। आज भी कैराना में व्यापारियों की दुकानों में पुलिस की बंदूक हर समय तनी रहती है और उसी के साये में व्यापारी व्यापार करते हैं।
कैराना में कई दुकानों पर तैनात है फोर्स
रामअवतार वर्मा की दुकान, राजकुमार सिंघल की दुकान, वरुण सिंघल की दुकान पर पुलिस फोर्स तैनात है। उधर, व्यापारियों का मानना है कि पुलिस की मौजूदगी में व्यापार भी प्रभावित होता है। क्योंकि जिसे सामान लेने आना है। वह पुलिस को देखकर पीछे हट जाता है। पुलिस न रहे तो मौत का डर और रहे तो फिर व्यापार ठप हो रहा।
कैराना में ये हैं रंगदारी के चर्चित मामले
2013 के दिसंबर में मूूला पंसारी के पौत्र अभय से दस लाख, 2013 के दिसंबर अंकुर सिनेमा, 2014 में पेप्सी वाले ईश्वर बिल्लू से दस लाख, 2014 में सुभाष से रंगदारी मांगी गई, 2014 अरविंद सिंघल बर्फ खाने वाले से पांच लाख, 2015 में संजय राजवंशी से रंगदारी मांगी, 2016 में सचिन परचून व्यापारी से पांच लाख रुपये, 2016 सितंबर में डॉ. आसफा से रंगदारी मांगी 2016 में गौरव चौहान से दस लाख रुपये की रंगदारी मांगी