शामली। दश लक्षण पर्व के आठवें दिन जैन संत विज्ञान सागर महाराज के सानिध्य में सम्मेद शिखर विधान का आयोजन किया गया। महाराज ने कहा कि त्याग धर्म, दान और पुण्य में आता है। जीव को असत्य, लोभ, मोह, द्वेष का त्याग करना चाहिए। बिना त्याग के जीव को जीवन में कुछ भी नहीं मिलेगा।
तालाब रोड स्थित जैन धर्मशाला में श्री दिगंबर जैन साधु सेवा समिति की ओर से सम्मेेद शिखर विधान का आयोजन किया गया। इंद्र और इंद्राणियों ने विधि विधान से पूजा अर्चना की। सौधर्म इंद्र श्रीपाल जैन, कमलेश जैन, राहुल जैन मौजूद रहे। शांतिधारा अभय जैन ने कराई। इस मौके पर जैन संत विज्ञान सागर जी महाराज ने त्याग धर्म के महत्व के संबंध में अवगत कराते हुए कहा कि साधु की तरह जीव को असत्य, लोभ, मोह, द्वेष का त्याग करना चाहिए। बिना त्याग के कुछ नहीं मिलेगा। सारा आग में जल रहा है। त्याग धर्म है, दान पुण्य में आता है। उन्होंने कहा कि जैन धर्म में दिन में शादी का विधान है। दानी व्यक्ति कभी दरिद्र नहीं बनता है।
श्री दिगंबर जैन साधु सेवा समिति के अध्यक्ष जेके जैन, अनिल जैन, प्रवीण जैन, सुशील, कनिष्क जैन, वीरेश जैन, सलेख चंद जैन, अरविंद जैन, अशोक जैन, सतेंद्र जैन आदि का सहयोग रहा। श्री दिगंबर जैन महासमिति आदिनाथ द्वारा परम पूज्य विज्ञान सागर जी महाराज के सानिध्य में बच्चों के लिए नृत्य प्रतियोगिता आयोजित की गई। जिसमें प्रथम सोनिया जैन, तनवी जैन द्वितीय, कृति जैन को तृतीय पुरस्कार दिए गए।