ऊन/शामली। गढ़ीपुख्ता में पटाखे बनाने वाली फैक्ट्री में मासूम बच्चों से पटाखों में बारूद भरवाया जा रहा था। दो पटाखा फैक्ट्रियों में छापे के दौरान यह सच्चाई सामने आई। श्रम विभाग की टीम ने पुलिस को साथ लेकर दोनों फैक्ट्रियों से आठ बच्चों को मुक्त कराया। फैक्ट्री मालिकों के खिलाफ नोटिस जारी किया है।
नगर पंचायत गढ़ीपुख्ता में चल रही पटाखा बनाने की फैक्ट्री में नाबालिगों से कार्य कराने की शिकायत एसडीएम ऊन एमपी सिंह को मिल रही थी। एसडीएम ने श्रम विभाग को मौके पर जाकर जांच और आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिया था। शुक्रवार को श्रम प्रवर्तन अधिकारी पीएन बिजलवान और निरीक्षक जगदीश चंद्र ने पुलिस बल को साथ लेकर गढ़ीपुख्ता में मिलन फायर वर्क्स और शकील फायर वर्क्स के यहां छापा मारा।
दोनों फैक्ट्रियों से रानी, शाहिद, शाहिल, नगमा, साहिद, साजिद, जुनैद, जुबेर आदि बच्चे कार्य करते पाए गए।
उक्त नाबालिगों को पटाखे बनाने में लगाया हुआ था। इस दौरान फैक्ट्री मालिक मौके से फरार हो गए। श्रम प्रवर्तन अधिकारी ने बच्चों को मुक्त करा एसडीएम के सामने लाकर पेश किया।
वहां से बच्चों को डाक्टरी कराने के लिए मुजफ्फरनगर भेज दिया गया। वहीं, फैक्ट्री मालिकों को नोटिस जारी किया गया है। एसडीएम ऊन एमपी सिंह ने बताया कि प्रकरण में जिलाधिकारी को रिपोर्ट भेज दी गई है। फैक्ट्री मालिकों के खिलाफ बाल श्रम कानून के उल्लंघन के तहत रिपोर्ट दर्ज कराई जाएगी।
खतरनाक है यह लालच
पटाखा बनाने की फैक्ट्रियों में मासूमों से कार्य लेना बेहद खतरनाक है। 2006 में कांधला में पटाखा फैक्ट्री में विस्फोट हो गया था, जिसमें नौ बच्चों की मौत हो गई थी। इसके अलावा थानाभवन की पटाखा फैक्ट्री में 2010 में इसी तरह पटाखा बनाते समय आग लगने पर दो युवकों की मौत हो गई थी। वहीं, थानाभवन की एक अन्य पटाखा फैक्ट्री में हादसे के दौरान एक किशोर की मौत हो चुकी है।
बगैर शिकायत नहीं जागता विभाग
बाल श्रम रोकने की जिम्मेदारी श्रम विभाग के पास है। जिले भर में ऐसे बहुत से उपक्रम और फैक्ट्रियां हैं जहां बालश्रम होता है। इसके बावजूद श्रम विभाग की नींद नहीं टूटती। एसडीएम ऊन के यहां शिकायत पर शुक्रवार को श्रम विभाग की टीम ने गढ़ीपुख्ता में छापा मारा, यदि शिकायत नहीं होती तो विभाग को भनक भी नहीं लगती।