शामली। नया सवेरा योजना के तहत नगर पालिका परिषद शामली में पथ प्रकाश के नाम पर बड़ा गोलमाल किए जाने का आरोप लग रहा है। चेयरपर्सन के पति ने मंडलायुक्त को शिकायत भेजकर कहा है कि जितनी स्ट्रीट लाइटों का टेंडर हुआ, उससे आधी भी लाइटें शहर में नहीं लगीं। इतना ही नहीं सामान की खरीद में बड़ा अंतर है।
आरोप है कि पथ प्रकाश के नाम पर करीब एक करोड़ 34 लाख रुपये का घोटाला किया गया है। मंडलायुक्त के निर्देश पर जिलाधिकारी ने प्रकरण की जांच के लिए समिति गठित कर दी है। शामली नगर पालिका की चेयरपर्सन अंजना बंसल के पति राजेश्वर बंसल ने मंडलायुक्त को शिकायत भेजकर आरोप लगाया कि वर्ष 2014-15 में नया सवेरा योजना के तहत शामली में सुंदरीकरण और पथ प्रकाश के लिए करीब चार करोड़ रुपये शासन से लिए गए।
उनसे फरवरी 2015 में शामली में शिवचौक से मुजफ्फरनगर मार्ग पर मित्तल पेट्रोल पंप तक 90 खंभे और एलईडी लगाने के लिए 26 लाख 95 हजार रुपये का टेंडर स्वीकृत किया गया, जबकि मौके पर सिर्फ 78 खंभे ही लगाए गए। वहीं, इन खंभों पर लगाने के लिए 180 एलईडी की खरीद की गई।
राजेश्वर बंसल का कहना है कि बाजार में एक खंभे की कीमत करीब 5000 रुपये है, जबकि खंभे की खरीद करीब 25000 रुपये में की गई। इसी तरह 90 वॉट की लाइट की कीमत करीब 3600 रुपये है, जबकि लाइटें 10075 रुपये की दर से खरीदी गईं। राजेश्वर बंसल का दावा है कि एक निजी कंपनी से कुटेशन लेने पर खंभे और लाइट की दर मालूम चली है। आरोप है कि इस कार्य में करीब 46 लाख 80 हजार रुपये का घोटाला किया गया।
वहीं, अनुसूचित जाति, जनजाति बस्तियों में सुं
दरीकरण हेतु एलईडी लाइट और सीएफएल लगाने के लिए मई 2015 में टेंडर स्वीकृत किया गया। उसमें 60 वॉट की 250 एलईडी खरीदना स्वीकृत किया गया, लेकिन लाइटें 568 खरीद ली गई। वहीं, मौके पर सिर्फ 250 लाइटें ही शहर में मौजूद हैं। इन लाइटों की खरीद में भी अंतर है।
एक लाइट 12000 रुपये की खरीदी गई, जबकि इसका रेट करीब 3250 रुपये है। आरोप है कि खरीदी गई 318 लाइटों का कुछ पता नहीं है। इस तरह से कुल 1,34,66,000 रुपये के घोटाले का आरोप लगाया गया है। उधर, सहारनपुर मंडलायुक्त दीपक अग्रवाल ने इस संबंध में जिलाधिकारी को पत्र भेजकर जांच कराने के निर्देश दिए थे। इसी के चलते 12 जनवरी को जिलाधिकारी इंद्र विक्रम सिंह ने प्रकरण की जांच कराने के लिए समिति का गठन किया, जिसमें एसडीएम शामली, विद्युत विभाग के अधिशासी अभियंता और लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता को जांच करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इस समिति को सात दिन के भीतर जांच पूरी करके रिपोर्ट भेजनी होगी।
जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित की
डीएम इंद्र विक्रम सिंह ने बताया कि नया सवेरा योजना के तहत शामली नगर पालिका परिषद क्षेत्र में स्ट्रीट लाइटें लगाने में वित्तीय अनियमितता की शिकायत मिली थी। उस पर तीन सदस्यीय समिति जांच के लिए गठित कर दी गई है। यदि जांच में वित्तीय अनियमितता की पुष्टि होती है, तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।