झिंझाना (शामली)। गांव जैनपुर निवासी किसान सतीश बंसल हत्याकांड का पुलिस ने खुलासा कर दिया है। पुलिस ने इस वारदात में शामिल तीन हत्यारोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। एक आरोपी अभी फरार है। पुलिस के मुताबिक उधार लिए गए रुपये का तकादा करने पर उसके दोस्तों ने किसान की हत्या की।
पुलिस गिरफ्त में आए हत्याभियुक्तों ने बताया कि सतीश से कई लाख रुपये उधार लिए हुए थे, जिनको वापस करने के लिए वह लगातार तकादा कर रहा था। इस बात से तंग आकर उसने अपने साथियों के संग सतीश को ठिकाने लगाने की साजिश रची। साजिश के तहत ही 20 अप्रैल को सतीश को डेरे पर बुलाकर उसे शराब पिलाई तथा फिर वहां बने कमरे में बंद कर लिया। पुलिस के मुताबिक आरोपियों ने आठ दिन पूर्व उसे फिर शराब पिलाई तथा जंगल में नलकूप पर ले जाकर फरसे से काट कर उसकी हत्या कर दी।
हत्याभियुक्तों ने शव को बोरे में भरकर गांव दभेड़ी के जंगल में डाल दिया था। थाना प्रभारी अवनीश गौतम ने बताया कि सतीश कि हत्या में सरदार गुलजार सिंह तौहिद उर्फ बिहारी, धर्मबीर और निक्का उर्फ देवेंद्र शामिल रहे हैं, जिनमें से निक्का अभी फरार है। तीनों आरोपियों को उनके घरों से गिरफ्तार कर उनकी निशानदेही पर दभेड़ी के जंगल से हत्या में प्रयुक्त फरसा व डंडे बरामद कर लिए गए हैं।
पत्नी और बच्चों के साथ नहीं बनती थी
झिंझाना। किसान सतीश की अपने परिवार से बनती नहीं थी। इसी के चलते उसके बेटे रिंकू, जितेंद्र और उसकी पत्नी प्रेमू करनाल में किसी फैक्ट्री में नौकरी करने लगे।
परिवार के लोग सतीश से भी लगातार करनाल आने का दबाव बना रहे थे, लेकिन वह वहां जाना नहीं चाहता था। इसी कारण उसने पत्नी व बेटों के खिलाफ पूर्व में कई बार शिकायत की थी, लेकिन पत्नी ने बेटों को छोड़कर उसके पास जाने से मना कर दिया था। गुलजार ने बताया कि उन्हें यह बात पता थी।
इसी का फायदा उठाकर सतीश के हत्या की साजिश का तानाबाना बुना। यदि सतीश को मार दिया जाए, तो उधार लिए रुपये वापस नहीं करने पडे़ंगे। अगर मामला खुलता भी है तो हत्या का शक उसके पुत्रों पर ही जाएगा। हालांकि सतीश के गायब होने पर उसके पुत्रों के अलावा पानीपत में रह रहे उसके भाई व भतीजों नेे भी उसे तलाश करने के लिए पैरवी की, जिसके चलते हत्याकांड का खुलासा हो सका।