शामली में लूट के आरोपियों का खुलासा करते एसपी।
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शामली के झिंझाना पुलिस ने अंतरराज्यीय गिरोह के पांच बदमाशों को गिरफ्तार किया है। गिरोह में चार बदमाश राजस्थान और एक शामली जिले का निवासी है। गिरोह के सरगना किशन को हत्या और अपहरण के मामले में उम्रकैद हो चुकी है। वह कर्नाटक की मैसूर जेल से 2016 में पेरोल पर आने के बाद से फरार चल रहा था। एसपी ने गिरोह के सदस्यों के पास से तीन तमंचे, कारतूस और दो चाकू बरामद करने का दावा किया है।
पुलिस अधीक्षक देवरंजन वर्मा ने बताया कि मुखबिर की सूचना पर शनिवार सुबह झिंझाना थाना प्रभारी संदीप बालियान और चौसाना चौकी प्रभारी ने पुलिस बल के साथ झिंझाना में पशु पैंठ के पास आम के बाग में बनी नलकूप से पांच बदमाशों को गिरफ्तार किया। गिरफ्तार आरोपियों में राजस्थान के थाना पाली क्षेत्र के ग्राम भागेश्वर निवासी किशन पुत्र लालाराम, जिला पाली के थाना सोजत क्षेत्र के संडिया निवासी बाबूराम पुत्र बागाराम, जिला पाली के ग्राम हीराबास निवासी आनंद पुत्र सोहनलाल, खोखरा निवासी रतन पुत्र शिवलाल और कस्बा झिंझाना के मोहल्ला माजरा निवासी राजेंद्र पुत्र फूल सिंह शामिल हैं।
एसपी ने बताया कि राजेंद्र और बाबूराम के कब्जे से एक तमंचा और छह कारतूस, आनंद और रतन के पास से चाकू बरामद किया गया है। पुलिस अधीक्षक ने बताया कि यह गिरोह तमिलनाडु, कर्नाटक, राजस्थान, बंगलूरू, हरियाणा और यूपी में आपराधिक वारदातों को अंजाम देता था। शनिवार को भी गिरोह के सदस्य झिंझाना में किसी सराफा व्यापारी के यहां डकैती डालने के लिए एकत्र हुए थे, लेकिन समय रहते मुखबिर से सूचना मिलने पर इन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। उन्होंने बताया कि कर्नाटक पुलिस को इस संबंध में सूचना दे दी गई है। पुलिस शामली के लिए रवाना हो गई है।
मैसूर जेल से पेरोल पर आया था किशन
पुलिस अधीक्षक ने बताया कि आरोपी किशन बेहद शातिर बदमाश है। वर्ष 2003 में बंगलूरू के थाना विवेकनगर क्षेत्र में शुभम और विकास की अपहरण के बाद हत्या कर दी गई थी। उस मामले में किशन को उम्रकैद हुई थी। 2016 में वह मैसूर जेल से पेरोल पर बाहर आया था, लेकिन उसके बाद वापस जेल नहीं गया। इसके अलावा आरोपी बाबूराम और आनंद भी आपराधिक मामले में गिरफ्तार होने पर बंगलूरू की जेल में बंद हुए थे, जबकि आरोपी रतन तमिलनाडु जेल में बंद हुआ था। वहीं, आरोपी राजेंद्र
के खिलाफ झिंझाना थाने में 2001 में चोरी, पुलिस पर हमले की रिपोर्ट दर्ज हुई, तो 2006 में लूट, 2007 में गुंडा एक्ट, पुलिस पर हमला, 2005 में सहारनपुर के तीतरो में लूट और जानलेवा हमले की रिपोर्ट दर्ज हुई थीं।
पुलिस को गुमराह करता रहा बदमाश
आरोपियों को गिरफ्तार करने पर जब पुलिस ने एक एक करके सभी आरोपियों से पूछताछ की, तो किशन पुलिस को अपना आपराधिक रिकार्ड बताने में गुमराह करता रहा। वह कहता रहा कि मेरी याददाश्त ठीक नहीं है।