शामली। जिले में खाकी के धुरंधर और कैराना का निरक्षर फुरकान। सात दिन बीते, लेकिन सुराग आज तक नहीं। यह है शामली में खाकी के धुरंधरों की बनी टीमों की कहानी। हालांकि इस दौरान पुलिस ने फुरकान से जुड़े 12 अन्य लोगों को जेल भेज दिया है, लेकिन फुरकान अभी तक भी पुलिस पकड़ से बाहर है।
फुरकान ने 2014 में कैराना में व्यापारी विनोद सिंघल की रंगदारी नहीं देने पर गोली मारकर हत्या की थी। पुलिस ने उस दौरान युवक को जेल भेज दिया था, लेकिन जमानत पर बाहर आने के बाद फुरकान ने कैराना में रंगदारी पर रंगदारी मांगकर दहशत का माहौल बना दिया। जो पुलिस के लिए परेशानी का सबब बन रहा है। सात दिन पूर्व ही फुरकान ने कैराना के सर्राफा व्यापारी रामअवतार वर्मा से रंगदारी मांगकर पुलिस की नींद उड़ा दी है।
एसपी ने इस मामले में शामली के धुरंधर माने जाने वाले पुलिसकर्मियों की आठ टीमें बनाई हुई हैं। क्राइम ब्रांच प्रभारी अंबिका प्रसाद भारद्वाज, कैरान कोतवाली प्रभारी उमेश रोरिया, आरके शर्मा, धर्मेंद्र पंवार सहित चौकी इंचार्जों को भी फुरकान को पकड़ने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। खाकी के सभी धुरंधर पिछले सात दिनों से खादर, बागपत, कैराना की खाक छान रहे हैं, लेकिन उन्हें फुरकान का कोई सुराग नहीं मिला।
इस मामले में एएसपी अनिल कुमार झा का कहना है कि फुरकान को पकड़ने के लिए कड़ा वर्क किया जा रहा है, जल्द ही उसे गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
कह रहे रिश्तेदार.. कैराना छोड़ दे रामअवतार
कैराना। सराफा व्यापारी से रंगदारी मांगे जाने के एक सप्ताह बीत जाने के बाद भी आरोपी फुरकान गिरफ्तार नहीं हो सका है। जिस कारण व्यापारी और उसका परिवार दहशत में जी रहा है। उधर, कैराना के हालत से सिर्फ स्थानीय व्यापारी ही दहशत में नहीं, बल्कि परिजनों के रिश्तेदार भी खौफ में हैं।
पिछले शुक्रवार को पूर्वाह्न 11 बजे सराफा बाजार में अपनी दुकान पर बैठे सराफा व्यापारी रामअवतार के पास बाइक द्वारा फुरकान ने पहुंचकर दो लाख की रंगदारी की मांगी थी। दहशत के चलते पूरे दिन वह खामोश रहा। इसके अगले दिन शनिवार को पड़ोसियों को रंगदारी मांगे जाने का पता चलने के बाद पुलिस विभाग हरकत में आया था।
पीड़ित की तहरीर पर कोतवाली में फुरकान निवासी मोहल्ला आलकलां के विरुद्ध रिपोर्ट दर्ज कर ली थी। उसके बाद से अपर पुलिस अधीक्षक अनिल कुमार झा के नेतृत्व में क्राइम ब्रांच व पुलिस की आठ टीमें फुरकान को पकड़ने में दिन रात लगी है। साथ ही पुलिस ने फुरकान को पनाह देने व साजिश में शामिल होने पर तीन महिलाओं सहित 12 लोगों को अभी तक जेल भेज दिया है। साथ ही बाजारों में पुलिस गश्त के अलावा रामअवतार की दुकान पर पुलिस की कड़ी सुरक्षा बैठा दी गई है, लेकिन इसके बावजूद भी फुरकान के हाथ नहीं आने पर व्यापारियों में जहां खौफ बना है, वहीं पीड़ित व्यापारी के परिजन व रिश्तेदार भी खौफजदा है।
खुद रामअवतार को कहना है कि उसके परिवार वालों के साथ ही रिश्तेदार भी उसी भी उसकी सुरक्षा की चिंता करते हुए कैराना से दूसरे शहर में चले जाने का दबाव बना रहे है कि कैराना छोड़कर कही ओर चला जा।
मोबाइल नहीं है, फिर भी सूचना तंत्र मजबूत
फुरकान के पास मोबाइल नहीं है। जबकि खाकी का सबसे पड़ा हथियार ही मोबाइल होता है, जिसके बाद माध्यम से पुलिस अपराधी तक पहुंच जाती है, फुरकान के पास मोबाइल नहीं है, जो फुरकान की मजबूती है, लेकिन मोबाइल नहीं होने पर भी उसका सूचना तंत्र मजबूत है। पुलिस उसकी तलाश में जहां जाती है, फुरकान को पुलिस के पहुंचने की सूचना पहले ही मिल जाती है।
पुलिस के पहुंचने से पहले ही हो जाता है गायब
कैराना हो या फिर बागपत, पुलिस ने उसकी तलाश में जहां-जहां दबिश दी, फुरकान वहां-वहां से भाग गया। पुलिस के आने से ही पहले ही शातिर फुरकान भाग जाता है। पुलिस बागपत गई, लेकिन बागपत से भी वह पुलिस के आने से पहले ही गायब हो गया। हालांकि इस दौरान सात दिनों में पुलिस ने उसके 12 से अधिक रिश्तेदारों को शरण देने और षड्यंत्र रचने के मामलों में जेल भेजा है।