शामली में कैराना पलायन का सच चाहे जो भी हो, लेकिन इस बात को कोई शायद ही स्वीकार करे कि यहां कानून का इकबाल बुलंद है। चाहे भाजपा सांसदों का डेलीगेशन हो या फिर संतों का, हर किसी ने लचर कानून व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। कुंद हो चुके सरकारी सिस्टम पर सवाल उठने लाजमी हैं। एनकाउंटर में कानूनी पचड़ों से बचने के लिए पुलिस एनकाउंटर से बचने लगी है। इससे अपराधियों के हौसले बढ़े हैं। वोटबैंक की राजनीति के चलते सरकार भी एनकाउंटर नहीं चाहती।
कैराना पलायन का मुद्दा भाजपा सांसद हुकुम सिंह सामने लाए। जाहिर है राजनीतिक तौर पर दूसरों दलों को यह बात नहीं पच रही, लेकिन इस सच से कोई इंकार नहीं कर रहा कि यहां की कानून व्यवस्था ठीक नहीं है। लचर कानून व्यवस्था के पीछे की कुछ वजहों पर गौर करें तो बदमाशों में पुलिस का खौफ नहीं है। बदमाशों से मुठभेड़ के कई ऐसे मौके रहे हैं, जिसमें पुलिस ने हालात को देखते हुए बदमाशों को मारने के बजाय जाने दिया। इन मामलों में एनकाउंटर आसान था, लेकिन गिरफ्तारी मुश्किल।
कानूनी पचड़ों से बचने के लिए पुलिस ने जबाबी गोलियां नहीं चलाई। अकेले शामली की बात करें तो पिछले चार साल में यहां किसी बड़े बदमाश का एनकाउंटर नहीं हुआ। पिछले दो दशक में आशुतोष पांडेय और नवनीत सिकेरा दो ही ऐसे एसएसपी रहे, जिन्होंने बदमाशों को चुन-चुनकर मार गिराया। आशुतोष पांडेय के खाते में 61 और सिकेरा के खाते में 54 एनकाउंटर हैं।
कई बदमाशों को तो दिनदहाड़े और भरे चौराहों पर मौत के घाट उतारा गया। पुलिस की इस तरह की कार्रवाई से पीड़ित परिवारों को राहत मिलती थी और साथ में कानून का खौफ भी अपराधियों पर दिखता था। उस समय कई ऐसे बड़े अपराधी रहे, जिन्होंने जान बचाने के लिए जिला छोड़ दिया या भूमिगत हो गए। सहारनपुर मंडल में पिछले साल महज एक बड़े बदमाश राहुल खट्टा का एनकाउंटर हुआ। वह भी तब, जब उसने पब्लिक के साथ ही पुलिस को भी निशाना बनाना शुरू कर दिया।
शामली लंबे समय तक खट्टा की शरणस्थली रहा। एनकाउंटर से पहले वह थानाभवन से ही सहारनपुर में दाखिल हुआ था। खट्टा के खात्मे के बाद उभरे मुकीम काला ने सिर उठाया। मुकीम ने चौथ वसूली में सारे रिकार्ड तोड़ दिए। वह पिछले साल 19 अक्टूबर को एसटीएफ के हत्थे चढ़ा। इस दौरान उसने खाकी पर गोलियां भी चलाई, लेकिन वह फिर भी पकड़ा गया।
पुलिस रिकार्ड में मुकीम पर हत्या के 16, लूट के 22 मामलों समेत कुल 30 मुकदमे दर्ज हैं। मुकीम पर 50 करोड़ से अधिक की लूट और रंगदारी एकत्र करने का आंकड़ा सामने आया था। तीन साल पहले पांच जून को हरियाणा में मुकीम गैंग ने दो पेट्रोल पंपों से लूटपाट कर भागते समय सहारनपुर में हसनपुर रजवाहे पर सिपाही राहुल ढाका की हत्या कर कारबाइन लूटने की बड़ी वारदात की थी। मुकीम इनदिनों महाराजगंज की जेल में बंद है, लेकिन उसका खौफ अभी भी व्यापारियों पर साफ देखा जाता है।