शामली के मोहल्ला हाजीपुरा और आजाद के चौक के लोगों के बीच जुलाई के अंतिम सप्ताह में पुरानी रंजिश के चलते ताबड़तोड़ फायरिंग हो गई थी।
इस मामले में पहला मुकदमा तीन अगस्त को लिखवाया गया था। उसके बाद तो जैसे की मुकदमों की बाढ़ सी आ गई। एक-एक कर दोनों पक्षों के बीच फायरिंग का यह खेल चलता गया और पुलिस पुलिस दोनों पक्षों की ओर से मुकदमे लिखती गई। एक-एक कर दोनों पक्षों की ओर से शामली कोतवाली में छह मुकदमे तथा एक मुकदमा थानाभवन थाने में लिखा दिया।
इस समेत कुल सात मुकदमे लिखे गए, लेकिन कमाल की बात है कि पुलिस मुकदमे तो लिखती रही, लेकिन गिरफ्तारी के नाम पर आंखें मूंदे रखी। धीरे-धीरे बढ़ते आपस में तनाव का बम रविवार को फिर फूटा और दोनों पक्षों में फिर फायरिंग हुई और तलवारें चली। जाहिर है कि यह शहर कोतवाली पुलिस की निष्क्रियता का ही फल है।
फिर से वहीं गलती दोहरा रहे अधिकारी ः अधिकारियों के दबाव के चलते शहर कोतवाली पुलिस ने इस मामले में चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया, जबकि दूसरे पक्ष के लोगों की ओर से पुलिस ने एक भी आरोपी को गिरफ्तार नहीं किया। ऐसे में फिर एक पक्ष के हौसले बुलंद हो रहे हैं। पुलिस की यहीं गलती शायद फिर न बवाल करा दे।