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शौचालयों के निर्माण में अंधेरगर्दी  

Fri, 19 May 2017 12:49 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शामली
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थानाभवन क्षेत्र के गांव मरगूबगढ़ में खाेदे गए शौचायल के गड्ढे। - फोटो : amar ujala
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शामली। स्वच्छ भारत मिशन के तहत खुले में शौच से मुक्त अभियान में जिले को अफसरों ने खुद की रिपोर्ट में ओडीएफ (ओपन डेफीकेशन फ्री) घोषित कर दिया। इसके बावजूद अब भी ऐसे कई गांव हैं, जहां रहने वाले लोग खुले में शौच जाने को मजबूर हैं। मजबूरी की वजह प्रशासनिक लापरवाही है। कहीं गांव में शौचालय का निर्माण नहीं कराया गया तो कहीं पर निर्माण अधूरा छोड़ दिया गया। 
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आंकड़ों के मुताबिक शामली जिले में दो वर्ष के दौरान करीब 34,810 शौचालयों का निर्माण कराया गया, जिस पर करीब 28 करोड़ रुपये खर्च किए गए। अमर उजाला टीम ने शौचालयों निर्माण की धरातल पर हकीकत जानी। इसमें कई गांव ऐसे पाए जहां पर शौचालयों का निर्माण ही नहीं हुआ। इन गांवों के लोग अब भी खुले में शौच जाने के लिए मजबूर हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि थानाभवन क्षेत्र के गांव मरगूबगढ़ में शौचालय निर्माण के लिए गड्ढे खुदवाकर ही छोड़ दिए गए। इस गांव के चमेल सिंह, माया, प्रेम, नरेशो, कासम, राजू, वाजिद और रामपाल के मकान में गड्ढे खोदे गए। उनमें जालीदार दीवार भी बनाई गई, लेकिन शौचालयों का निर्माण नहीं हुआ। करीब चार महीने से यह गड्ढे हादसों को बढ़ावा दे रहे हैं। इस गांव के बिजेंद्र का कहना है कि अधिकारियों के कहने पर ग्रामीणों ने गड्ढे खोदे, जिस पर पैसा भी खर्च हुआ। हालांकि अभी तक शौचालय बनाने के लिए पैसा नहीं दिया गया। कई बार अधिकारियों से इसकी शिकायत की जा चुकी है। 

 शौचालयों की हालत बद से बदतर 
कैराना देहात के गांव बदलूगढ़ निवासी मांगी, कृष्ण, राजकुमार और देवेंद्र के यहां शौचालय निर्माण नहीं हुआ। उनका कहना है कि शौचालय नहीं होने की वजह से खुले में शौच करने के लिए जाना पड़ता है। वहीं, इसी गांव के मजरा इस्लामनगर के कुछ घरों में बिना छत और बगैर गेट वाले टूटे फूटे शौचालय मिले। गांव के लोगों का कहना है कि शौचालय बनाने में गंभीरता नहीं बरती गई। 
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बामनोली में खुले में शौच जाने को विवश 
कांधला। गांव असदपुर जिडाना के मजरा बामनौली में शौचालयों का निर्माण नहीं होने की वजह से लोगों को खुले में शौच के लिए जाना पड़ रहा है। लोगों का आरोप है कि प्रधान से कई बार शिकायत करने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हुआ। राजेश, विमला, सुरेश, विनोद शर्मा, प्रदीप शर्मा, अजय शर्मा, अशोक शर्मा, सतेंद्र शर्मा, जयप्रकाश आदि ने बताया कि उनके गांव के अधिकतर लोग खुले में शौच करने जाते हैं। गांव में केवल दो परिवारों के यहां पर शौचालय बना है। वहीं, गांव असदपुर जिडाना में भी रजनीश, राकेश, तेजपाल के यहां शौचालय नहीं है। 

मंडल स्तरीय कमेटी उठा चुकी है सवाल 
ओडीएफ घोषित करने के लिए तीन स्तर पर जांच होती है। पहली जांच ग्राम पंचायत स्तर, दूसरी ब्लाक स्तर और तीसरे जिले स्तर पर होती है। जिला स्तर से जांच होने के बाद मंडल स्तर पर रिपोर्ट भेजी जाती है। इसके बाद मंडल स्तरीय कमेटी सत्यापन करने के बाद ही जिले को ओडीएफ घोषित करती है। स्वच्छ भारत मिशन के तहत शौचालयों का निर्माण कराने के बाद जिला स्तर से अधिकारियों ने खुद की रिपोर्ट में जिले को ओडीएफ घोषित कर दिया। इसकी रिपोर्ट बनाकर मंडल स्तर पर भेज दी गई, लेकिन मंडल स्तरीय कमेटी ने सत्यापन किया, तो करीब 38 गांवों में शौचालयों के निर्माण कार्य अधूरे मिले। इसके चलते मंडल स्तरीय कमेटी ने शामली जिले को ओडीएफ घोषित नहीं किया। 

जिले के पांचों ब्लाक क्षेत्र के 230 गांवों में शौचालयों का निर्माण कराया गया। कुछ गांवों में कार्य अधूरा रह गया है। मंडल स्तरीय कमेटी के सत्यापन में जिन गांवों में कार्य अधूरे पाए गए हैं, उनमें कार्य कराया जा रहा है। ऐसे गांवों से प्रस्ताव मंगाकर शौचालयों का निर्माण कराया जाएगा। मरगूबगढ़ गांव में गड्ढे खोदकर छोड़े जाने की उन्हें जानकारी नहीं है। चेक कराकर शीघ्र ही निर्माण कराया जाएगा। 
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सतीश कुमार, जिला पंचायत राज अधिकारी
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