शामली/झिंझाना। उत्तर प्रदेश और हरियाणा के किसानों के बीच भूमि स्वामित्व का विवाद कई दशक पुराना है। यमुना नदी की धारा बदलने के कारण यह विवाद बनता है। विवाद का निस्तारण करने के लिए दीक्षित आयोग का गठन भी हुआ था और पिलर भी लगाए गए थे, लेकिन लंबे समय से यह विवाद खत्म नहीं हो रहा और हर साल दोनों प्रदेशों के किसानों में टकराव होता रहा है।
सोमवार को झिंझाना क्षेत्र के गांव बल्हेड़ा और हरियाणा के गांव राणा माजरा के किसानों में टकराव हो गया, जिसमें बल्हेड़ा निवासी किसान राजेश की गोली लगने के कारण मौत हो गई, जबकि उसका चाचा सुभाष गंभीर रूप से घायल हो गया। अकेले झिंझाना क्षेत्र ही नहीं, बल्कि कैराना और कांधला क्षेत्र में भी यमुना नदी के खादर में दोनों प्रदेशों के किसानों में यही सीमा विवाद चलता रहता है। एक पखवाड़ा पूर्व ही कांधला क्षेत्र में यूपी के किसानों ने हरियाणा के किसानों पर जबरन फसल काटने और विरोध करने पर मारपीट करने का आरोप लगाया था। वहीं, कैराना क्षेत्र के किसानों ने जब सरसों की फसल काटी थी, तो हरियाणा के किसानों ने पुलिस को झूठी सूचना देकर फसल पकड़वा दी थी।
वहीं, पूर्व में भी कई बार यूपी और हरियाणा के किसानों में सीमा विवाद को लेकर टकराव के मामले सामने आते रहे हैं। वर्ष 2010 में गांव बिड़ौली सैदान के किसानों और हरियाणा के घरौड़ा गांव के किसानों में 250 बीघा जमीन पर कब्जे को लकर गोलियां चली थीं, जिसमें बिड़ौली के कई किसान घायल हुए थे। हरियाणा के एक दर्जन से अधिक किसानों के खिलाफ थाना झिंझाना में रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। सवाल यह है कि हर साल दोनों प्रदेशों के किसानों में टकराव होता है, लेकिन इस विवाद का समाधान नहीं हो पा रहा है।
गौरतलब है कि एक सप्ताह पूर्व ही दोनों प्रदेशों के अधिकारियों की राजस्व परिषद के चेयरमैन के समक्ष बैठक भी होनी थी, लेकिन किसी कारण से वह बैठक टल गई थी। हालांकि पूर्व में दोनों प्रदेशों के पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की कई बार बैठकें हो चुकी हैं, लेकिन उनका भी कोई हल नहीं निकल पाया।
उधर, सीओ कैराना ने बताया किसीमा विवाद को लेकर दोनों ओर के किसानों के बीच झगड़ा हुआ है। एक व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि दूसरा घायल है। तहरीर आने पर रिपोर्ट दर्ज कर कड़ी कार्रवाई की जा रही है। झिंझाना और कैराना पुलिस के साथ ही पीएसी भी तैनात की गई है।