चौसाना में सड़क हादसे में घायल हुए छात्र-छात्राएं।
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शामली के चौसाना में बस चालकों की लापरवाही से 65 स्कूली बच्चों की जान पर बन आई। तेज रफ्तार के कारण चौसाना-ऊन मार्ग पर दो बसों की आमने सामने की भिड़ंत हो गई। एक बस बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। बस में सवार छह बच्चे, दो अध्यापक और चालक घायल हो गया। वहीं, दूसरी बस भी क्षतिग्रस्त हो गई, लेकिन उसमें कोई घायल नहीं हुआ। घायल चालक को गंभीर हालत के चलते करनाल रेफर किया गया है।
चौसाना के ऊन मार्ग पर गांव बल्ला माजरा के पास शुक्रवार सुबह करीब सवा आठ बजे गुरू गोविंद सिंह हाईस्कूल सुंदरनगर और होली हेवेन पब्लिक स्कूल की बस की आमने सामने से भिड़ंत हो गई। गुरु गोविंद सिंह स्कूल की बस में करीब 50 बच्चे सवार थे जबकि होली हेवेन स्कूल की बस में 15 बच्चे सवार होकर स्कूल जा रहे थे। हादसे के बाद होली हेवेन स्कूल बस का चालक मौके से फरार हो गया, जबकि गुरु गोविंद सिंह स्कूल बस में सवार कक्षा सातवीं की छात्रा खुशी, शिखा, वंश कक्षा छह, हर्ष और कुश कक्षा चार तथा सक्षम कक्षा नर्सरी के अलावा बस चालक बाबूराम निवासी भोगी माजरा, अध्यापक सुरेशपाल और प्रीतम निवासी भोगीमाजरा घायल हो गए।
इसके बाद मौके पर सैकड़ों ग्रामीण इकट्ठा हो गए। इसी दौरान पुलिस भी पहुंच गई। पुलिस और ग्रामीणों ने बस में फंसे बच्चों और चालक को बाहर निकाला। घायलों को ऊन स्थित स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया। वहां से गंभीर हालत के चलते चालक बाबूराम को करनाल स्थित निजी चिकित्सालय ले जाकर भर्ती कराया गया। चौकी इंचार्ज नेमचंद सिंह का कहना है कि घटना के संबंध में जांच की जा रही है। अभी तहरीर नहीं मिली है, आरोपी चालक के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
बिलखते रहे बच्चे, फरार हो गया चालक
ऊन मार्ग पर दो स्कूल बसों की भिड़ंत के बाद गुरु गोविंद सिंह स्कूल की बस बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। उसमें फंसे बच्चे चीखते चिल्लाते रहे, लेकिन होली हेवेन स्कूल की बस के चालक ने बच्चों को निकालने में दिलचस्पी नहीं दिखाई, बल्कि वह मौके से फरार हो गया। इसके बाद जब मौके पर ग्रामीण इकट्ठा हुए और पुलिस आ गई, तो बच्चों को बस से बाहर निकाला गया। चालक बाबूराम भी तब तक बस में फंसा हुआ था। उसे भी निकालने के बाद अस्पताल भेजा गया।
फिर उजागर हुई प्रशासन की लापरवाही
आला अफसरों की तरफ से समय समय पर एआरटीओ और पुलिस प्रशासन को स्कूल बसों का नियमानुसार संचालन कराने का आदेश दिया जाता है। बसों की जांच करने की बात कही जाती है, लेकिन एआरटीओ और पुलिस प्रशासन के स्तर पर इसमें लापरवाही बरती जा रही है। यही वजह है कि ऊन मार्ग पर हुए हादसे में होली हेवेेन स्कूल की बस खटारा हालत में थी, लेकिन इसकी जांच नहीं हुई। उसका रजिस्ट्रेशन का समय भी गत वर्ष जून माह में पूरा हो चुका है। क्योंकि एनजीटी ने भी 10 साल पुराने डीजल वाहनों के संचालन पर रोक लगाने का निर्देश दिया हुआ है। बावजूद इसके एआरटीओ और पुलिस प्रशासन को ऐसे वाहन दिखाई नहीं देते हैं।
पूर्व में भी होते रहे हैं ऐसे हादसे
लापरवाही की वजह से स्कूल बसों के कारण हादसे पूर्व में भी हो चुके हैं। 20 दिन पूर्व ही थानाभवन क्षेत्र में कादरगढ़ पुलिया के पास स्कूल वैन सड़क किनारे खाई में उतर गई थी, जिसमें कई बच्चे चोटिल हो गए थे। एक साल पूर्व झिंझाना क्षेत्र में एक स्कूल की बस अनियंत्रित होकर खेत में पलट गई थी। उस हादसे में कई बच्चे घायल हो गए थे। दो साल पूर्व थानाभवन-ऊन मार्ग पर एक स्कूल वैन में आग लग गई थी। आसपास के खेतों में कार्य कर रहे किसानों ने मौके पर पहुंचकर बच्चों को स्कूल वैन से बाहर निकाला था। वहीं, छह माह पूर्व कैराना क्षेत्र में झाड़खेड़ी मार्ग पर स्कूल वैन की अज्ञात वाहन से टक्कर हो गई थी।