गांव रामड़ा में अवैध कब्जा हटवाने पहुंचे तहसीलदार।
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शामली के कैराना के उत्तर प्रदेश और हरियाणा प्रदेश के कई दशक पुराना सीमा विवाद एंटी भू-माफिया टीम के सामने भी आ गया। सीमा पर गांव रामड़ा में सरकारी भूमि को कब्जा मुक्त कराने पहुंची कैराना की प्रशासनिक टीम का हरियाणा के किसानों और प्रशासन ने विरोध कर दिया। जिसके चलते टीम को बगैर कब्जे हटवाए लौटना पड़ा।
तहसीलदार अभयराज पांडेय शनिवार को कानूनगो और लेखपालों की टीम के साथ पुलिसबल लेकर क्षेत्र गांव रामड़ा पहुंचे। वहां कई बीघा सरकारी भूमि पर भूमाफियाओं ने अवैध कब्जा करके फसल बो रखी है। इसके बाद प्रशासन ने राजस्व रिकार्ड के आधार पर भूमि की पैमाइश कराकर जेसीबी से फसल को नष्ट करना शुरू किया। इसी बीच हरियाणा के दर्जनों किसानों ने मौके पर पहुंचकर टीम का विरोध करते हुए हंगामा कर दिया। हरियाणा के किसानों का आरोप है कि उक्त 40 बीघा जमीन हरियाणा सरकार की है और यूपी प्रशासन उक्त भूमि पर कार्रवाई नहीं कर सकता।
इस दौरान हरियाणा के समालखा तहसीलदार और बापौली पुलिस भी मौके पर पहुंच गई। यूपी का राजस्व रिकार्ड उक्त भूमि को यूपी सरकार की दर्शा रहा था, जबकि हरियाणा के किसानों ने भी उक्त भूमि को अपना बताया। इसके बाद दोनों प्रदेशों के अधिकारियों की वार्ता हुई, जिसमें तय किया गया कि विवाद के निस्तारण के लिए जल्द ही दोनों प्रदेशों के अधिकारियों की बैठक होगी, जिसमें राजस्व रिकार्ड का मिलान किया जाएगा। इसके बाद टीम लौट आई।
दोनों पक्षों के बीच हो गई तनाव की स्थिति
सीमा विवाद के फिर उछलने से सीमा पर दोनों प्रदेशों के किसानों के बीच तनाव की स्थिति पैदा हो गई है। तहसीलदार कैराना अभयराज पांडेय ने बताया कि जब वह यमुना के इस और रामडा से लगती 40 बीघा भूमि से कब्जा हटवा रहे थे, तो हरियाणा के किसानों ने विरोध किया था। इसके बाद कब्जा नहीं हटाया जा सका। हालांकि, कुल 300 बीघा भूमि में से लगभग 150 बीघा भूमि से बिना विरोध के चलते कब्जा हटवा दिया गया है। 40 बीघा भूमि सीमा विवाद के चलते और बाकी 110 बीघा जमीन समय अभाव के कारण कब्जा मुक्त नहीं कराई जा सकी। जल्द दोनों प्रदेशों के बीच बैठक होगी, इसमें भू-अभिलेखों व शजरों का मिलान किया जाएगा।
हर साल होता है किसानों में टकराव
उत्तर प्रदेश और हरियाणा सीमा विवाद लगभग चार दशक से चल रहा है। इसके चलते हर साल ही दोनों प्रदेशों के किसानों के बीच टकराव होता रहा है। कई बार किसानों के बीच लाठी-डंडे और फायरिंग हुईं थी, इसमें दोनों प्रदेशों के किसान घायल तक होते रहे हैं।
बैठक होती रही, पर निस्तारण नहीं
सीमा विवाद के निस्तारण के लिए कभी हरियाणा, तो कभी यूपी में दोनों प्रदेशों के अधिकारियों के बीच बैठक होती रही हैं। इसमें भू-अभिलेखों का मिलान होता है, लेकिन इतना लंबा समय बीतने के बाद कोई भी हल नहीं निकल पाया है।
हरियाणा के किसान करते हैं उत्पीड़न
किसानों के बीच चल रहे सीमा विवाद पर नजर डाली जाए, तो यूपी के किसान स्पष्ट रूप से हरियाणा के किसानों पर उत्पीड़न के आरोप लगाते रहे हैं।
एक साल पूर्व ही हरियाणा के किसानों ने यूपी के किसानों की फसलों में आग तक लगा दी और कृषि यंत्र भी फूंक डाले थे।