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पुलिस की जांबाजी को चूना लगा गए बदमाश

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शामली।
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कई थानों की पुलिस और ग्रामीणों की भीड़ मौके पर मौजूद। बावजूद इसके बदमाश फिरौती की रकम वसूलते हैं और फरार हो जाते हैं। सब कुछ पुलिस के सामने हुआ, मगर पुलिस कुछ भी नहीं कर सकी, बस हाथ मलती रह गई। बदमाशों की रणनीति के आगे पुलिस बेबस नजर आई। अभी तक मुठभेड़ों में बदमाशों को मार गिराने और कई बड़े बदमाशों को दबोचने का दंभ भरने वाली शामली पुलिस के सामने रविवार रात बदमाशों ने ऐसी चुनौती पेश कर दी, जिसके आगे पुलिस की जांबाजी भी धरी रह गई।
दरअसल, रविवार रात करीब साढ़े आठ बजे सोंता रसूलपुर के लकड़ी व्यापारी मौमीन और रिजवान का बदमाशों ने अपहरण कर लिया। इसके बाद करीब नौ बजे बदमाशों ने मौमीन के मोबाइल से ही उसके परिजनों को कॉल करके एक लाख रुपये फिरौती मांगी। फिरौती की रकम लेने के लिए तितारसी नदी पुल के पास एक सुनसान स्थान पर बुलाया। साथ ही चेतावनी दी कि रकम लेकर अकेले ही आना।
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बदमाशों ने फिरौती वसूलने और फरार होने की पूरी साजिश रच चुके थे, जिसके चलते मौमीन के परिजनों को स्पष्ट चेतावनी दी कि अगर हमें पुलिस के आने अथवा पुलिस के वाहनों की भनक लगी, तो इन दोनों को जान से मार देंगे। इस कारण परिवार के लोग भी बुरी तरह घबराए हुए थे। हालांकि इस सबके बीच पुलिस भी नहीं समझ पा रही थी कि आखिर किया क्या जाए। क्योंकि दोनों लकड़ी व्यापारी को सकुशल बदमाशों के चंगुल से छुड़ाने की चुनौती थी। इसमें पुलिस की किरकिरी भी हो गई, क्यों कि रात के अंधेरे में लगातार मुठभेड़ करने वाली पुलिस इस घटना में मुठभेड़ के बारे में सोच भी नहीं पाई और बदमाश अपना काम करके फरार हो गए। खास बात यह है कि जब अपहर्ताओं ने फिरौती की रकम वसूली, तो बाबरी, थानाभवन सहित कई थानों की पुलिस के अलावा पुलिस अधिकारी भी मौके पर पहुंच गए थे। बावजूद इसके पुलिस बदमाशों को नहीं पकड़ पाई।
पांचों बदमाश हथियारों से लैस थे
बदमाशों के चंगुल से छूटकर आए लकड़ी व्यापारी रिजवान ने बताया कि वह और मौमीन जब बाइक से आ रहे थे, तो तितारसी पुल के पास ही पांच बदमाशों ने उन्हें रोक लिया। बदमाशों में दो के पास पिस्टल थी, जबकि अन्य के पास तमंचे थे। इसके बाद बदमाश उन्हें नहर पुल से कच्चे रास्ते पर एक खेत पर ले गए। वहीं से मौमीन के मोबाइल फोन से परिजनों को कॉल करके फिरौती की रकम मांगी गई। बदमाशों ने मुंह पर कपड़ा बांध रखा था, जिससे उनका चेहरा वह देख नहीं पाया। हालांकि बदमाश स्थानीय भाषा ही बोल रहे थे।
एक लाख से शुरू, 50 हजार पर माने
लकड़ी व्यापारी के परिजनों से बदमाशों ने शुरुआत में एक लाख रुपये की फिरौती मांगी। जब परिवार के लोगों ने कहा कि इतना पैसा हमारे पास नहीं, तो बदमाशों ने फिरौती की रकम घटा दी थी। इस बीच फोन पर बातचीत होती रही, जिसके बाद परिजनों ने सिर्फ 50 हजार रुपये ही अपने पास होने बताए, तो बदमाश इस रकम पर भी मान गए। इसी के चलते 50 हजार रुपये लेने के बाद अपहृत मौमीन और मुनीर को बदमाशों ने छोड़ा।
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मौमीन को अपने साथ ले गए एसपी
बदमाशों के चंगुल से छूटकर आने के बाद रिजवान तो परिजनों के साथ आ गया, जबकि मौमीन को पुलिस अधीक्षक डाक्टर अजयपाल शर्मा अपने साथ थानाभवन की तरफ ले गए। वहां थानाभवन थाने पर ही उससे बदमाशों का हुलिया और घटना के बारे में पूरी जानकारी ली गई। उधर, पुलिस और ग्रामीणों की मौजूदगी के बावजूद फिरौती की रकम वसूले जाने और बदमाशों के फरार होने पर लोगों ने जमकर हंगामा भी किया।
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