शामली। पिछले तीन साल में जिला सेवा योजन कार्यालय की लागत बीस लाख रुपये बढ़ गई है। जिला सेवायोजन कार्यालय का इसी माह शासन को एक करोड़ 41 लाख रुपये की धनराशि का एस्टीमेट लोक निर्माण विभाग प्रांतीय खंड शामली की ओर से भेजा गया है। तीन साल पहले एक करोड़ 21 लाख रुपये का एस्टीमेट गया था। पिछले तीन साल में दो मंजिला जिला सेवा योजन कार्यालय की लागत बीस लाख रुपये बढ़ गई है।
पूर्वी यमुना नहर के किनारे नवीन जिला मुख्यालय गोहरनी में जिला सेवा याेजन कार्यालय के लिए 500 वर्ग गज मीटर भूमि जिला प्रशासन ने आरक्षित की थी। दो मंजिला जिला सेवायोजन कार्यालय भवन का लोक निर्माण विभाग प्रांतीय खंड की ओर से एक करोड़ 21 लाख रुपये की लागत का एस्टीमेट बनाकर तत्कालीन डीएम जसजीत कौर ने शासन को भेजा था। शासन ने लोक निर्माण विभाग से री-एस्टीमेट मांगा था। शासन के निर्देश पर जिला सेवायोजन कार्यालय का री-एस्टीमेट गत सात मार्च 2024 को लोक निर्माण विभाग की ओर से एक करोड़ 41 लाख रुपये का बनाकर शासन को भेजा है। री-एस्टीमेट पर शासन में विचार विमर्श किया गया। जिला सेवा योजन कार्यालय अधिकारी अजय कुमार शर्मा ने बताया कि लोकसभा चुनाव समाप्त होने के बाद जून माह में दो मंजिला जिला सेवायोजन कार्यालय भवन की धनराशि अवमुक्त होने की उम्मीद जग गई है। अवमुक्त धनराशि के बाद लोकनिर्माण विभाग इस कार्यालय निर्माण के लिए टेंडर छोड़ने की प्रक्रिया शुरू करेगा। ठेकेदार नामित होने के बाद जिला सेवा योजन कार्यालय का निर्माण शुरू होगा।
-पिछले 13 साल से मुजफ्फरनगर से संचालित हो रहा है जिला सेवा योजन कार्यालय
जिला बनने से पहले शामली और मुजफ्फरनगर जिला मुख्यालय का जिला सेवायोजन कार्यालय मेरठ रोड पर सुजडू गांव में संयुक्त रूप से चल रहा है। शामली जिले में सेवा योजन की गतिविधियां होने पर जिला मुख्यालय आते हैं। जिला बनने के 13 साल बाद भी जिला सेवायोजन कार्यालय स्वीकृत नहीं हुआ है।
शासन में 27 मार्च को हुई थी बैठक, जिले से नहीं पहुंचे अफसर
लोक निर्माण विभाग के सहायक अभियंता संजीव कुमार सिंह का कहना है कि शासन से लोक निर्माण विभाग प्रांतीय खंड शामली के अफसरों को जिला सेवायोजन कार्यालय बजट के संबंध में 27 मार्च 2024 को बैठक में बुलाया गया था। जिले में पहले चरण में लोकसभा चुनाव होने से बैठक में लोक निर्माण विभाग प्रांतीय खंड की ओर से कोई अफसर शामिल नहीं हो पाया था।