शामली। खोखरी नदी को पुनर्जीवन मामले में कार्य योजना से असंतुष्ट होने पर जहां राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण ने डीएम शमली और सहारनपुर को तलब किया है। दोनों अधिकारियों को छह दिसंबर को वर्चुअल रूप से मौजूद रहने के निर्देश दिए। उधर, खोखरी नदी से अतिक्रमण हटाने के लिए विभागीय अधिकारियों के निर्देश पर निर्माण कार्य शुरू कर दिया गया है।
खोखरी नदी में हो रहे अतिक्रमण, प्रदूषण को लेकर अमित कुमार ने एनजीटी में याचिका लगाई थी, जिस पर सुनवाई करते हुए एनजीटी ने भारत सरकार के जल संसाधन नदी विकास और गंगा संरक्षण विभाग और शामली, सहारनपुर के जिलाधिकारियों, उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को कार्रवाई करने के आदेश दिए थे। उन्हें नदी के विभिन्न जगहों से पानी के नमूने एकत्र करने, उनका सावधानीपूर्वक विश्लेषण करने और प्रदूषण के मूल कारणों की पहचान करने को कहा गया है।
एनजीटी ने अगस्त में फिर से सुनवाई की। एनजीटी ने नदी के लिए कार्य योजना मांगी थी। इस पर पांच विभाग वन विभाग, सिंचाई विभाग, प्रदूषण विभाग के साथ ही जिला पंचायत और उप जिलाधिकारी ऊन को जिम्मेदारी दी गई थी। टीम ने सर्वे किया और फिर कब्जाधारकों को भी नोटिस जारी किए थे। 26 अगस्त को इस मामले में एनजीटी में सुनवाई थी। जिसमें कार्य योजना भी पेश की गई थी, एनजीटी ने असंतुष्टी जाहिर की और फिर से कार्य योजना बनाने को कहा है। डीएम रविंद्र सिंह का कहना है कि उन्हें एनजीटी की तरफ से अभी कोई पत्र नहीं मिला है। मामले की जानकारी की जा रही है। खोखरी नदी पर कार्य शुरू करा दिया गया है।
- भूजल स्तर में होगी वृद्धि
जिला परियोजना अधिकारी डाॅ. सोनू ने कहा कि खोखरी नदी के पुनरुद्धार से क्षेत्र में भूजल स्तर में वृद्धि में महत्वपूर्ण योगदान मिलेगा, जिससे स्थानीय कृषि और आजीविका को लाभ होगा। इसके अतिरिक्त, नदी के पुनर्जीवन से जैव विविधता बढ़ेगी, प्राकृतिक आवास बहाल होंगे और प्रदूषण से होने वाले स्वास्थ्य संबंधी खतरे कम होंगे।
- यहां से गुजर रही नदी
खोखरी नदी सहारनपुर जिले में शुरू होकर, शामली जिले के चौसाना, मुस्तफाबाद, सकौती, कमालपुर, गूजरपुर, अजीजपुर और केरटू सहित कई गांवों से होकर गुजरती है और ख्वाजपुरा में यह यमुना नदी में विलीन हो जाती है।