- जंगल में सरकारी भूमि पर पेड़ कटने की अनुमति न मिलने से आ रही बाधा
- सहारनपुर-शामली में 46 किमी में से 28 किमी पर भूमि पर कब्जा मिला कब्जा
विकास की बात
संवाद न्यूज एजेंसी
शामली। बहु प्रतीक्षित छह लेन का 121 किमी लंबाई वाला अंबाला-शामली ग्रीन फील्ड इकोनमिक काॅरिडोर एक्सप्रेसवे का प्रोजेक्ट की यदि दस दिन में निर्माण एजेंसी को 90 प्रतिशत भूमि पर कब्जा नहीं मिला तो अंबाला-शामली इकोनमिक काॅरिडोर एक्सप्रेसवे का बरसात के बाद निर्माण कार्य शुरू होगा।
121 किमी लंबाई का अंबाला-शामली ग्रीन फील्ड इकाेनमिक काॅरिडोर एक्सप्रेसवे में शामली जिले के 12 गांव और 29 गांव सहारनपुर जिले के शामिल है। शामली जिले में 15 किमी में से दस किमी और सहारनपुर जिले में 31 किमी में से 18 किमी कुल 67 प्रतिशत भूमि पर निर्माण एजेंसी को अलग-अलग जगह कब्जा मिला है। निर्माण एजेंसी को अगले दस दिनों में ग्रीन फील्ड एक्सप्रेेस वे के प्रोजेक्ट हैंडओवर नहीं हुआ तो बरसात के बाद एक्सप्रेसवे का निर्माण कार्य शुरू हो पाएगा।
निर्माण एजेंसी के प्रोजेक्ट मैनेजर केके शर्मा ने बताया कि एक्सप्रेसवे का सहारनपुर जिले की यमुना नदी से थानाभवन क्षेत्र के गोगवान जलालपुर तक 46 किमी कार्य का निर्माण किया जाना है। सहारनपुर जिले में जंगल और लीज पर दी गई सरकारी भूमि पर पेड़ों के कटान की अनुमति अभी नहीं मिली है। जिसके चलते वहां 90 प्रतिशत भूमि पर कब्जा नहीं मिल पाया है। करीब पांच किमी क्षेत्र में बाग में पेड़ कटने की अनुमति वन एवं पर्यावरण मंत्रालय से नहीं मिली है। इस मामले में सहारनपुर के डीएम अखिलेश कुमार सिंह, सहारनपुर के भूमि अध्यापित अधिकारी के साथ सोमवार को बैठक कर चुके हैं। उनका कहना है कि थानाभवन में उनका प्लांट पूरी तरह तैयार हो चुका है, लेकिन बरसात के बाद अंबाला-शामली ग्रीन फील्ड इकोनमिक काॅरिडोर का निर्माण कार्य शुरू हो पाएगा।
153 करोड रुपये का शामली में बंट चुका है कि किसानों को मुआवजा
एडीएम संतोष कुमार सिंह ने बताया कि अंबाला-इकोनमिक काॅरिडोर एक्सप्रेसवे का 180 करोड़ रुपये में से 153 करोड़ रुपये का मुआवजा वितरित किया जा चुका है। 37 करोड़ रुपये का मुआवजा विवादित भूमि का रह गया है। विवाद समाप्त कर बाकी मुआवजा भी वितरित कर दिया जाएगा।