शामली में पूर्वी यमुना नहर खस्ताहाल पटरी
शामली। दो हाईवे को जोड़ने वाली दो किमी लंबाई की पूर्वी यमुना नहर की पटरी पिछले कई वर्षों से बजट के अभाव में अधूरी पड़ी है। पूर्वी यमुना नहर खंड और लोक निर्माण विभाग ने पटरी निर्माण के लिए पिछले चार वर्षों से बजट नहीं मांगा है। बजट के अभाव में इस पूर्वी यमुना नहर की पटरी पर वाहनों का संचालन नहीं हो रहा है।
जिला बनने के बाद करमूखेड़ी पुल से भैंसवाल गांव तक 10 किमी लंबी पूर्वी यमुना नहर दोनाें साइड की पटरी निर्माण कराया गया था। नवीन जिला मुख्यालय के पास दो पुल, भैंसवाल से मुंडेट कला गांव तक नहर के अंदर टाइल और दोनों ओर पटरी का डोला निर्माण सड़क के लिए 44 करोड़ रुपये का इस्टीमेट बनाकर शासन काे भेजा था गया। इस परियोजना को शासन से 2015 में स्वीकृति मिल गई थी। वर्ष 2018-19 तक ठेकेदार पश्चिम दिशा की ओर भैंसवाल गांव के पुल से लेकर मेरठ-करनाल हाईवे तक आठ किमी लंबी पटरी और दूसरी ओर भैंसवाल गांव से गढ़ीपुख्ता रोड तक पटरी का निर्माण किया। इस परियोजना में नवीन मुख्यालय के दो पुलों का भी निर्माण हुआ। इस दौरान निर्माण एजेंसी ने दो किमी लंबी पटरी का निर्माण अधूरा छोड़ दिया, जो पांच वर्ष से अधूरा पड़ा है।
पूर्वी यमुना नहर खंड के अधिशासी अभियंता रविंद्र राणा ने बताया कि दो किमी लंबी पटरी की जद में आ रहे बिजली खंभों को हटाने के लिए एक करोड़ रुपये की धनराशि जमा करने के बाद भी विद्युत निगम ने बिजली के खंभे नहीं हटाए। इस कारण से नहर पटरी का निर्माण पूरा नहीं हो पाया। नहर पटरी परियोजना के लिए स्वीकृत 44 करोड़ की धनराशि खर्च हो चुकी है। नए सिरे से धनराशि शासन से मांगी जाएगी। शासन से धनराशि स्वीकृत होने के बाद पटरी का निर्माण कार्य पूरा किया जाएगा।
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दस मीटर नहर पटरी चौड़ीकरण की परियोजना भी अधूरी
संवाद न्यूज एजेंसी
शामली। नवीन जिला मुख्यालय भैंसवाल से लेकर करमू खेड़ी नहर पुल तक दस मीटर नहर पटरी चौड़ीकरण की परियोजना तीन साल पहले तैयार हुुई थी। पूर्वी यमुना नहर खंड ने पटरी लोक निर्माण विभाग प्रांतीय खंड को हैंडओवर कर दी थी। लोक निर्माण विभाग के तत्कालीन अधिशासी अभियंता रविंद्र सिंह ने पूर्वी दिशा की नहर पटरी की परियोजना का बिजली, सड़क निर्माण का 22 करोड़ रुपये का एस्टीमेट तैयार कराया था। नहर पटरी की जद में आ रहे वन विभाग के पेड़ों का एस्टीमेट तैयार होना था, लेकिन पेड़ों के कटान की अनुमति न आने से एस्टीमेंट नहीं बन पाया था। यह परियोजना पिछले तीन साले से लंबित है। सीडीओ शंभूनाथ तिवारी ने बताया कि डीएम रविंद्र सिंह को अवगत कराकर लोक निर्माण विभाग, वन, विद्युत निगम और पूर्वी यमुना नहर खंड के अधिकारियों की बैठक बुलाकर इस परियोजना को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया जाएगा।