शामली। बकाया गन्ना मूल्य भुगतान को लेकर खाप चौधरियों, सर्वखाप समन्वय किसान मंच द्वारा गन्ना समिति कार्यालय में पंचायत आयोजित की गई। बकाया भुगतान नहीं करने पर किसानों की मिल के अधिकारियों से नोकझोंक हुई। बाद में किसानों ने कहा कि यदि 30 अगस्त तक उनका बकाया गन्ना भुगतान नहीं किया गया तो वे एक सितंबर से शुगर मिल पर तालाबंदी कर देंगे।
सोमवार को शामली गन्ना सहकारी समिति कार्यालय में खाप चौधरियों और सर्वखाप समन्वय किसान मंच के पदाधिकारियों की पंचायत हुई। पंचायत में त्रिवेणी चीनी मिल समूह के अधिकारियों को बुलाया गया। पंचायत में त्रिवेणी समूह के यूनिट हैड अनिल त्यागी के गैरहाजिरी में गन्ना महाप्रंबधक बलधारी सिंह, सतीश बालियान, उपमहाप्रबंधक दीपक राणा, करणपाल सरोहा आदि पहुंचे। मिल के अधिकारियों ने नया गन्ना भुगतान आगामी 15 अगस्त तक और वर्ष 2022-23 का बकाया गन्ना भुगतान आगामी 30 सितंबर तक करने की पेशकश रखी जिसे किसानों ने ठुकरा दिया।
बाद में किसानों के कहने पर शामली चीनी मिल के अधिकारियों ने डीसीओ कार्यालय में पहुंचकर त्रिवेणी समूह के अधिकारियों से वार्ता की। दो चरणो में मिल अधिकारियों की घोषणा से किसान सहमत नहीं हुए। किसान पिछले साल के बकाया 214 करोड़ रुपये लेने की मांग पर अड़े थे। इस दौरान किसानों की मिल के अधिकारियों से तीखी नोकझोंक भी हुई।
बाद में खाप चौधरियों और सर्व खाप किसान समन्वय मंच के अध्यक्ष संजीव चौधरी सिलावर ने कहा कि शामली मिल के अधिकारियो को दस अगस्त तक नया गन्ना भुगतान और 30 अगस्त तक पुराना संपूर्ण गन्ना भुगतान का समय दिया गया है। साफ कहा कि 30 अगस्त तक संपूर्ण भुगतान नहीं हुआ तो आगामी 31 अगस्त को शामली गन्ना सहकारी समिति में महापंचायत होगी। एक सितंबर को शामली चीनी मिल पर तालाबंदी की जाएगी।
पंचायत में डीसीओ रणजीत सिंह कुशवाहा, शोकेंद्र भैसवाल, श्याम सिंह बहावड़ी थांबेदार, संजीव हसनपुर थांबेदार, रविंद्र सिंह लांक थांबेदार, ऋषिपाल सिंह राठी थांबेदार करोड़ी, जयपाल सिह कसेरवा, नितिन वर्मा, रणपाल सिह, ओमकुमार कुड़ाना, महक सिंह, सुरेंद्र आर्य, कवरपाल हसनपुर, सुधीर बनत, विनोद, राजवीर सिंह मौजूद रहे। पंचायत की अध्यक्षता चेनपाल सिंह खंदरावली और संचालन यशपाल सिंह शेखपुरा की ओर से किया गया।
हर बार आश्वासन मिलता है
किसानों ने पंचायत में कहा कि उन्हें हर बार मिल प्रशासन की ओर से जल्द बकाया भुगतान करने का आश्वासन दिया जाता है। मगर भुगतान नहीं किया जाता, जिसके कारण किसानों को आर्थिक परेशानी का भी सामना करना पड़ रहा है। किसान बच्चों की स्कूल की फीस तक जमा नहीं कर पा रहे हैं। बेटियों की शादी में भी परेशानी हो रही है।