केस-2
गढ़ीपुख्ता के रहने वाले कक्षा 4 के छात्र ने चाइल्ड लाइन पर कॉल कर बताया कि पिता बेवजह उसके साथ मारपीट करते हैं। कई बार उसे डांटा भी जाता है। जांच में पता चला कि अधिकतर समय घर से बाहर खेलने के कारण पिता ने बेटे को डांट दिया था। इस पर बच्चे ने चाइल्ड लाइन से शिकायत कर दी।
केस-3
कैराना के रहने वाले कक्षा पांच के छात्र ने शिकायत करते हुए कहा कि अध्यापक उसके साथ बेवजह मारपीट करते हैं। इसके कारण वह सही से पढ़ाई भी नहीं कर पा रहा है। विभागीय अधिकारियों ने जांच की तो पता चला कि पढ़ाई नहीं करने के कारण अध्यापक ने छात्र को डांट दिया था।
यह तीन मामले तो बानगी भर हैं। हर माह 8 से 10 मामले चाइल्ड लाइन पर इस तरह के आ रहे हैं, जिसमें मासूम पिता-माता और अध्यापकों पर मारपीट का आरोप लगाते हुए शिकायत कर रहे हैं।
काउंसिलिंग की जाती है
वन स्टाॅप सेंटर और चाइल्ड लाइन प्रभारी गजाला त्यागी ने बताया कि परिजनों, अध्यापकों पर मारपीट का आरोप लगाते हुए छात्र शिकायत कर रहे हैं। इस तरह के मामलों में बच्चे की काउंसिलिंग की जाती है। इसके अलावा उसके परिजनों और अध्यापक को भी समझाया जाता है। चार माह में इस तरह की शिकायतें बढ़ी हैं।
प्यार के साथ आएं पेश
मनोवैज्ञानिक डाॅ. अरुण राय का कहना है कि अभिभावकों या फिर अध्यापकों को बच्चों के साथ प्यार के साथ पेश आना चाहिए। कई बार अधिक डांटने पर बच्चा अधिक गुस्से में आ जाता है। होमवर्क करने या फिर अन्य कामों को प्यार से बताया जाए तो बच्चे जल्दी करने का प्रयास करते हैं। बच्चों की गतिविधियों पर भी अभिभावकों को ध्यान रखना चाहिए।