शाामली। जैसे-जैसे लोकसभा चुनाव नजदीक आते जा रहे हैं। वैसे-वैसे राजनैतिक दलों ने संपर्क अभियान तेज कर दिया है। सपा से कैराना लोकसभा सीट पर प्रत्याशी इकरा हसन की घोषणा के बाद सभी दलों के नेता चुनावी आंकड़ों में जुट गए हैं। वहीं बसपा ने बूथ चलो अभियान के तहत गांवों में जाकर पार्टी की नीतियों को बताना शुरू कर दिया है। बसपा पदाधिकारियों का कहना है कि रालोद-भाजपा गठबंधन का सीधे लाभ बसपा को मिलेगा।
कैराना लोकसभा सीट की अगर बात की जाए तो यहां पर हाल ही में सपा ने हसन परिवार की इकरा हसन को प्रत्याशी घोषित किया है, जबकि भाजपा-रालोद गठबंधन, बसपा से कोई भी प्रत्याशी अभी घोषित नहीं किया गया है। बसपा के जिला प्रभारी सुनील कुमार जाटव ने बताया कि बसपा ने पिछले एक माह से बूथ चलो अभियान चलाया हुआ है, जिसके तहत शामली शहर के अलावा बनत, खेड़ी करमू, लिलौन, मतनावली, मादलपुर, कांधला, कैराना, थानाभवन, जलालाबाद में अब तक पचास से अधिक कार्यक्रम आयोजित किए जा चुके हैं।
लोगों को बसपा सुप्रीमो मायावती के वर्ष 2007 से लेकर 2012 तक के कार्यकाल की उपलिब्धयां गिनाई जा रही हैं। बताया जा रहा है कि उन्होंने अपने कार्यकाल में जहां बेसहाराओं के लिए कांशीराम आवास बनाए। वहीं तीन बार अपने कार्यकाल में गन्ना रेट बढ़ाया, कानून व्यवस्था को सदृढ बनाने में अहम भूमिका निभाई। कहा कि बूथ चलो अभियान का इतना असर हुआ कि मजदूर, किसानों के अलावा सबसे अधिक मुस्लिम वर्ग के लोग बसपा के साथ जुड़ रहे हैं। भाजपा-रालोद के गठबंधन के बाद मुस्लिम रालोद से मुखर हो गया है, जिसका सीधा लाभ बसपा को मिलेगा। अभी किसी प्रत्याशी की घोषणा बसपा ने नहीं की है, जो भी प्रत्याशी घोषित किया जाता है, उसे मजबूती के साथ चुनाव लड़ाया जाएगा। बसपा मुस्लिम, किसान, मजदूर, दलित मतों के आधार पर कैराना लोकसभा सीट पर जीत दर्ज करेगी।
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अन्य दलों के कई नेता भी लाइन में
सूत्रों के अनुसार बसपा इस बार अकेले ही चुनाव लड़ने की तैयारी में है। कैराना लोकसभा सीट पर कुछ अन्य दलों के नेता बसपा पदाधिकारियों और बसपा सुप्रीमो से संपर्क बनाए हुए हैं। माना जा रहा है कि वह पार्टी को छोड़कर बसपा का दामन थाम सकते हैं। बसपा से अभी कोई संभावित प्रत्याशी भी खुलकर सामने नहीं आया है। सुनील जाटव का कहना है कि बसपा गठबंधन नहीं करेगी। जिसे भी पार्टी प्रत्याशी घोषित करती है, उसे मजबूती के साथ चुनाव लड़ाकर जिताया जाएगा।