शामली। शहर से करीब 10 किलोमीटर की दूरी पर बसे बंतीखेड़ा कबड्डी खिलाडियों के गांव के रूप में जाना जाता है। यहां के कबड्डी खिलाड़ी देशभर में गांव का नाम रोशन कर रह रहे हैं। यहां के 50 से अधिक स्टेट और नेशनल स्तरीय कबड्डी खिलाड़ी पुलिस, आर्मी, शिक्षा आदि विभागों में तैनात हैं। यही नहीं, यहां के रहने वाले नेशनल खिलाड़ी और कोच परविंदर तोमर खुद गांव में ही 50 खिलाड़ियों को निशुल्क कबड्डी के टिप्स देकर तैयार कर रहे हैं, जिनमें 10 से अधिक खिलाड़ी नेशनल स्तर की तैयारी कर रहे हैं।
बंतीखेड़ा गांव की आबादी करीब साढ़े 9 हजार हैं। गांव महाभारत कालीन मौजूद गुंबद के लिए देशभर में जाना जाता है। गांव दूसरी पहचान यहां के कबड्डी खिलाड़ी है। स्टेट से लेकर नेशनल स्तर तक धमाल मचाने वाले गांव के संजीव कुमार सहारनपुर में कोच, राजीव रेलवे में क्लर्क, कमल टीचर, परविंदर कोच, गौरव, सिद्धार्थ और अमित आर्मी में हवलदार, अमित सिपाही, मोहित, निशांत और अनुभाव रेलवे में टीटीई हैं।
यही नहीं गांव के नेशनल स्तरीय खिलाड़ी परविंदर तोमर गांव में ही मैदान पर गांव और आसपास क्षेत्र के युवाओं को निशुल्क कबड्डी के गुर सिखा रहे। उनकी पाठशाला में 50 खिलाड़ी कबड्डी की एबीसीडी सीख रहे हैं। मैदान में मोहित, वंश, राजा, रजनीश, मोहित, शोकत आदि स्टेट से लेकर नेशनल स्तरीय प्रतियोगिता के लिए तैयारी में जुटे हुए हैं। कोच परविंदर का कहना है कि जब तक शरीर में जान रहेगी,वह गांव के खिलाड़ियों को निशुल्क कबड्डी के टिप्स देते रहेंगे।
जानिए.. आखिर गांव का नाम क्यों पड़ा बंतीखेड़ा
गांव की प्रधान सावित्री देवी, डाॅ. राजबीर सिंह, मांगेराम, कोच परविंदर सिंह का कहना है कि बुजुर्ग बताते हैं कि गांव में पहले पेड़-पौधे अधिक थे, जिसके कारण गांव का नाम वन के बनाम पर बंतीखेड़ा रखा गया था।
अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी महीपाल ने शुरू कराई थी कबड्डी
ग्रामीणों के अनुसार करीब 1970 में गांव के कबड्डी खिलाड़ी महीपाल सिंह ने गांव में कबड्डी का खेल शुरू किया था। उन्होंने श्रीलंका तक में मेडल जीतकर गांव का नाम रोशन किया। बाद में वह खुद भी यहां पर कबड्डी खिलाड़ियों को टिप्स देते थे। उन्हीं से सीख लेकर गांव के युवाओं ने कबड्डी खेल की तरफ रुख किया था।
अभिमन्यु खेलो इंडिया में मचा चुके धमाल
गांव के कबड्डी खिलाड़ी अभिमन्यु जयपुर की कबड्डी टीम में खेल रहे हैं। उनके पिता प्रवीण कुमार किसान हैं। अभिमन्यु ने बताया कि पिता भी कबड्डी के खिलाड़ी रहे हैं। वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेलकर नाम रोशन करना चाहते थे। पिता का सपना पूरा करने के लिए कड़ी मेहनत कर रहा हूं। अभी तक दिल्ली में वर्ष 2019 में हुए खेलो इंडिया, आजमगढ़ में हुई सीनियर स्टेट चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीते हैं। अब साई सेंटर में प्रैक्टिस की जा रही है।
गांव में हो नेशनल स्तरीय मैदान
गांव के पुनित चौधरी, मोनू जांगलान, ग्राम प्रधान सावित्री देवी का कहना है कि गांव की पहचान यहां के कबड्डी खिलाड़ी हैं। मगर गांव में खिलाड़ियों के लिए अत्याधुनिक मैदान नहीं है। सरकार से मांग है कि गांव में नेशनल स्तरीय मैदान बनवाया जाए, ताकि खिलाड़ियों को सुविधा मिल सके।