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विश्व हेपेटाइटिस दिवस: जिले में अब जांच के साथ उपचार की भी सुविधा

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विश्व हेपेटाइटिस दिवस : समय पर कराएं उपचार, लापरवाही हो सकती है खतरनाक
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कैराना ब्लॉक के गांवों में सामने आ रहे सबसे ज्यादा केस
संवाद न्यूज एजेंसी
शामली। जिले मेें हेपेटाइटिस के मरीज लगातार सामने आ रहे हैैं। अब अस्पताल में हेपेटाइटिस बी और सी की जांच के साथ ही उपचार की सुविधा भी उपलब्ध है। चिकित्सकों का कहना है हेपेटाइटिस से घबराएं नहीं, उसकी समय पर जांच कराकर उपचार कराएं। इसमें लापरवाही खतरनाक हो सकती है।
जिला अस्पताल में हेपेटाइटिस सी के लगभग 1022 और हेपेटाइटिस बी के 57 मरीजों का उपचार चल रहा है। इनमें करीब 70 फीसदी मरीज कैराना ब्लॉक से हैं। इसके बाद कांधला, थानाभवन, ऊन और सबसे कम शामली ब्लॉक के हैं। हेपेटाइटिस मूल रूप से लीवर की बीमारी है, जो वायरल संक्रमण से होती है। शुरुआत में ही लक्षण नजर आने पर जांच कराकर उपचार शुरू कर दिया जाए तो यह बीमारी ठीक हो जाती है। बरसात में नमी ज्यादा होने तथा सफाई न होने से वायरल संक्रमण खतरा रहता है। जिससे हेपेटाइटिस रोग होने की आशंका बढ़ जाती है। ज्यादातर हेपेटाइटिस सी यानि काला पीलिया के मरीज सामने आ रहे हैं। जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. सफल कुमार का कहना है कि अस्पताल में हेपेटाइटिस बी और सी की जांचकर मरीजों को दवा दी जाती है।
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पांच तरह का होता है हेपेटाइटिस
फिजीशियन डॉ. पंकज गर्ग ने बताया कि हेपेटाइटिस ए से ई तक पांच तरह का होता है। हेपेटाइटिस ए बहुत हल्की बीमारी होती है, जो सफाई व सही खानपान से स्वत: ठीक हो जाती है। हेपेटाइटिस ई गर्भवती महिला को होने की आशंका रहती है। हेपेटाइटिस बी व सी गंभीर बीमारी होती है। हेपेटाइटिस डी सीधे नहीं होती, वह हेपेटाइटिस बी वाले को दोहरा संक्रमण होने पर होती है। हेपेटाइटिस बी से बचाव के लिए वैक्सीन उपलब्ध है। हेपेटाइटिस सी की वैक्सीन नहीं बनी है, लेकिन इसकी दवा है।
जांच के लिए दो बार लगता है शिविर
सीएचसी शामली के लैब टेक्नीशियन अशोक कुमार ने बताया कि हेपेटाइटिस बी व सी की जांच की सुविधा है। रोजाना औसतन आठ से दस मरीजों की जांच कार्ड से होती है। जिनमें दो- तीन केस हेपेटाइटिस पॉजिटिव के आते हैं। कार्ड की जांच में जो मरीज हेपेटाइसिटस पॉजिटिव पाए जाते हैं, उनकी जांच के लिए महीने में 10 व 25 तारीख को शिविर लगाया जाता है।
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हेपेटाइटिस सी का तीन माह तक उपचार
हेपेटाइटिस सी का तीन माह लगातार उपचार चलता है। जिला अस्पताल से मरीज को एक माह की दवा एक बार में दी जाती है। तीन माह तक दवा लेनी होती है। छह महीने बाद फिर से मरीज की जांच कराई जाती है। दोबारा पॉजिटिव पाए जाने पर मरीज को मेरठ मेडिकल कॉलेज भेजा जाता है। हेपेटाइटिस बी का दो साल तक उपचार चलता है।
लक्षण
- पेट दर्द होना
- उल्टी होना
- बुखार आना
- कमजोरी, थकान व चक्कर आना
बचाव
- उबला हुआ साफ पानी पीना
- सफाई का खास ध्यान रखना
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