शामली में फूलपुर और गोरखपुर लोकसभा उपचुनाव के परिणाम सामने आने पर राजनीतिक समीकरण बदल गए हैं। बसपा और रालोद के समर्थन के चलते दोनों सीटों पर सपा प्रत्याशियों ने जीत दर्ज की। ऐसे में कैराना लोकसभा सीट के उपचुनाव पर भी राजनीतिक दलों की नजरें हैं। इसी के चलते राजनीतिक दलों ने अपनी सक्रियता बढ़ा दी हैं। यदि इस सीट पर भी विपक्षी दलों ने गठजोड़ करके चुनाव लड़ा, तो भाजपा के लिए यह सीट जीतना किसी चुनौती से कम नहीं होगा।
कैराना लोकसभा सीट में शामली जिले की थानाभवन, कैराना और शामली विधानसभा क्षेत्र तो सहारनपुर जिले के गंगोह और नकुड़ विधानसभा क्षेत्र शामिल हैं। इस लिहाज से कैराना लोकसभा सीट का दखल जिलों में होता है। वहीं, तीन फरवरी को कैराना के भाजपा सांसद हुकुम सिंह का निधन होने जाने के कारण कैराना लोकसभा सीट रिक्त हो गई। इसके बाद ही अटकलों का दौर प्रारंभ हो गया था कि कैराना लोकसभा सीट पर उपचुनाव में किस दल का कब्जा होगा। एकतरफ भाजपा कैराना सीट को फिर से पाने के लिए पूरी ताकत लगाएगी, तो सपा, रालोद, बसपा और कांग्रेस भी कोई कसर छोड़ने वाली नहीं हैं। वहीं, फूलपुर और गोरखपुर के चुनाव परिणामों से कयास लगाए जा रहे हैं कि कैराना सीट के उपचुनाव में भी विपक्षी दल गठबंधन के फार्मूले पर चल सकते हैं। ऐसे में भाजपा के लिए कैराना सीट पर जीत दर्ज करना बड़ी चुनौती होगा। उधर, पूर्व में हुए चुनावों पर नजर डाली जाए, तो 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के हुकुम सिंह ने कैराना लोकसभा सीट जीती, तब उनके सामने सपा प्रत्याशी के रूप में नाहिद हसन चुनाव लड़े थे। हुकुम सिंह को 5,65,909 वोट प्राप्त हुए थे, जबकि नाहिद हसन को 3,29,081 वोट मिले थे। वहीं, 2009 के उपचुनाव में पूर्व सांसद मुनव्वर हसन की पत्नी तबस्सुम हसन इस सीट पर हुकुम सिंह को हराकर सांसद चुनीं गईं। तबस्सुम हसन को 2,83,259 वोट मिले थे, जबकि हुकुम सिंह को 2,60,796 वोट मिले थे।
राजनीतिक दलों की स्थिति
भाजपा -- पूर्व सांसद हुकुम सिंह की बेटी मृगांका सिंह अपने पिता की विरासत को संजोकर रखने के लिए प्रयासरत हैं। वह क्षेत्र में सक्रियता बढ़ा रही हैं। गांवों और कस्बों में विभिन्न अवसरों पर लोगों से मुलाकात भी कर रही हैं। वहीं, पूर्व सांसद हरपाल सिंह पंवार के बेटे यतेंद्र चौधरी एडवोकेट भी कैराना लोकसभा सीट से उपचुनाव को लेकर तैयारियों में जुटे हुए हैं। अब देखना यह है कि उपचुनाव में भाजपा का प्रत्याशी कौन होगा।
रालोद -- कैराना लोकसभा सीट के उपचुनाव को लेकर रालोद ने अपनी तैयारियां प्रारंभ कर दी हैं। रालोद मुखिया चौधरी अजित सिंह 9 और 10 मार्च को शामली में दो दिवसीय दौरे पर आए थे। सद्भावना यात्रा के नाम से उन्होंने कार्यकर्ताओं को एकजुटता का संदेश दिया। वहीं, पूर्व सांसद अमीर आलम और उनके बेटे नवाजिश खान के बाद जलालाबाद के पूर्व चेयरमैन अशरफ अली खान को रालोद में शामिल किया गया। इसके जरिये रालोद जाट-मुसलिम गठजोड़ को मजबूत करने में लगा है। वहीं, चर्चा है कि कैराना लोकसभा सीट के उपचुनाव में रालोद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष जयंत चौधरी को चुनाव मैदान में उतारा जा सकता है।
सपा -- समाजवादी पार्टी से कैराना लोकसभा उपचुनाव में टिकट पाने के लिए कई सपा नेताओं की दावेदारी बताई जा रही है। एक तरफ कैराना विधायक नाहिद हसन की मां पूर्व सांसद तबस्सुम हसन हैं, तो दूसरी तरफ सपा एमएलसी वीरेंद्र सिंह और उत्तर प्रदेश योजना आयोग के पूर्व सदस्य प्रोफेसर सुधीर पंवार भी दावेदारों की लाइन में हैं।
-------- बीते चुनावों की स्थिति
-------- विधानसभा चुनाव 2017
सीट --------- भाजपा -- सपा/कांग्रेस -- रालोद --बसपा
कैराना ------- 77529------98654-----19903 ----6858
शामली -------70085------40365-----33551----17114
थानाभवन --- 90995----- 13480-----31275----74178
-------- कैराना लोकसभा चुनाव 2014
भाजपा -------- 5,65,909
सपा ----------- 3,29,081
रालोद --------- 42,706
बसपा --------- 1,60,414