किराना घराने के अहसान अली होंगे बिस्मिल्लाह खां युवा पुरस्कार से सम्मानित
कैराना (शामली)। किराना घराना भारतीय शास्त्रीय संगीत के लिए विश्व में विख्यात है। किराना घराना की तीसरी पीढ़ी के युवक अहसान अली को सारंगी वादक के लिए संगीत नाटक एकेडमी दिल्ली की तरफ से उस्ताद बिस्मिल्लाह खां युवा पुरस्कार से सम्मानित करने के लिए चुना गया है।
देश-विदेश में भारतीय शास्त्रीय संगीत के लिए प्रसिद्ध किराना घराना के प्रतिनिधि गायक अब्दुल करीम खां व उस्ताद अब्दुल वहीद खां साहब को इस घराने का संस्थापक कहा जाता है। किराना घराने का नाम कस्बा कैराना (किराना) से हुआ है। यह स्थान उस्ताद अब्दुल करीम खां का जन्म स्थान है। किराना घराना से जुड़े उस्ताद महमूद खां का परिवार मौजूदा समय में कैराना नगर के मोहल्ला आलकला में रहता है। उस्ताद महमूद खां के बेटे मरहूम उस्ताद आसिफ अली का इकलौता बेटा अहसान अली कुछ साल पहले कैराना छोड़कर दिल्ली के लक्ष्मी नगर में जाकर रहने लगा था। सोमवार को कैराना पहुंचे अहसान अली ने बताया कि वह दिल्ली में म्यूजिक डायरेक्टर है और सारंगी वादक बजाने का काम करता हैं। उसने 10 साल की उम्र में ही अपने दादा उस्ताद महमूद खां व पिता उस्ताद आसिफ अली खां से सारंगी वादक सीख लिया था। दिल्ली में रहते हुए वह ऑस्ट्रेलिया के सिडनी के ओपेरा हाउस, लंदन ओलंपिक, अमेरिका व पेरिस आदि देशों में जा चुका हैं। हाल ही में संगीत नाटक एकेडमी दिल्ली की ओर से सारंगी वादक के लिए उसे उस्ताद बिस्मिल्लाह खां युवा पुरस्कार से सम्मानित करने के लिए चयनित किया गया है। यह अवार्ड उसे 2021 के लिए दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि पुरस्कार समारोह की अभी तारीख तय नहीं हुई है।
- पिता दिल्ली आकाशवाणी में करते थे नौकरी
सारंगी वादक एवं किराना घराना की तीसरी पीढ़ी के अहसान अली ने बताया कि 2008 में उसके पिता उस्ताद आसिफ अली दिल्ली आकाशवाणी में सरकारी नौकरी करते थे। 2017 में उसके पिता की मौत हो गई थी। उनके निधन के बाद उसने अपने पारिवारिक संगीत घराने सारंगी वादक को पूरी तरह अपना लिया था।
- कैराना के पहलवान से है बचपन की दोस्ती, कैराना में रहते हैं चाची और चचेरा भाई
वर्षों पहले कैराना की गलियों में पले बड़े सारंगी वादक अहसान अली का आज भी कैराना से पूरी तरह लगाव है। समय-समय पर अहसान अली कैराना पहुंचते है। सोमवार को भी वह कैराना पहुंचे और मोहल्ला आलकला निवासी पहलवान सुफियान से मुलाकात की। अहसान अली ने बताया कि सुफियान पहलवान उसके बचपन का दोस्त हैं और दोनों आज भी दोस्त है। सारंगी वादक एवं किराना घराना से जुड़े अहसान अली की चाची व चचेरा भाई तथा अन्य परिवार के लोग आज भी मोहल्ला आलकला में रहते हैं।