: कुछ किसान बोले, ठीक हुआ समझौता तो कुछ बोले उन्हें अभी भी मिल प्रशासन पर विश्वास नहीं, जल्द करें बकाया भुगतान
शामली। गन्ना मूल्य के बकाया भुगतान के लिए किसानों ने 95 दिन तक धरना दिया। मिल प्रशासन को भी बार-बार वार्ता करने को मजबूर किया। अब भले ही धरना मिल और प्रशासनिक अधिकारियों से वार्ता के बाद खत्म कर दिया गया हो मगर मगर किसानों की जेब अभी भी खाली ही हैं। किसानों का कहना है कि भले ही किसानों के हित में मिल को चालू कराने के लिए धरने को खत्म कर दिया गया हो, मगर उन्हें अभी भी मिल मालिक पर विश्वास नहीं है। जल्द से जल्द उनका बकाया गन्ना भुगतान होना चाहिए। कुछ किसानों ने किसान हित में समझौते को सही बताया है।
शामली शुगर मिल से करीब 75 हजार किसान जुड़े हुए हैं। आरोप है कि एशिया की पुरानी शुगर मिलों में शुमार शामली शुगर मिल किसानों को समय पर भुगतान नहीं करती। जिस कारण पिछले दस साल से किसान बकाया भुगतान के लिए धरना-प्रदर्शन करने को मजबूर हो रहे हैं। बकाया गन्ना भुगतान की मांग लेकर किसानों ने शुगर मिल में 20 अगस्त को धरना शुरू किया था। किसान नेता संजीव शास्त्री, खाप चौधरी संजय कालखंडे, संजीव कुमार सिलावर ने अन्य किसानों के साथ लगातार 95 दिन तक धरना दिया।
इस दौरान मिल के एमडी राहल लाल की पहली वार्ता भाजपा एमएलसी वीरेंद्र सिंह के जसाला आवास पर किसानों से हुई। डीएम, एडीएम के साथ-साथ किसानों की प्रशासन और चीनी मिल अधिकारियों के साथ 15 से अधिक वार्ताएं हुईं, मगर संपूर्ण बकाया भुगतान नहीं देने पर किसान नहीं माने।
अंत में मिल प्रशासन द्वारा किसानों को नए सत्र में 14 दिन का भुगतान, मिल से होने वाली आमदनी से किसानों के रुपये देने के आश्वासन के बाद किसानों ने धरना समाप्त करने की घोषणा बृहस्पतिवार को कर दी। धरना तो समाप्त हो गया मगर किसान अभी भी यही सोच रहे हैं कि आखिरकार उन्हें मिला क्या? क्योंकि एक भी रुपया किसानाें के खातों में अभी नहीं आया है। किसानों की जो मांग थी वह धरना समाप्त होने के बाद भी जस की तस बनी हुई है।
- आंदोलन को महापंचायतों से मिली थी ताकत, छह महापंचायतें हुईं
95 दिन तक चले आंदोलन को रालोद सुप्रीमो जयंत चौधरी, भाकियू अध्यक्ष नरेश टिकैत, राकेश टिकैत, हरियाणा के अजय अभय चौटाला आदि नेताओं ने भी समर्थन दिया था। सभी ने संपूर्ण गन्ना भुगतान की मांग की थी। एक महापंचायत में सबसे पहले भाकियू के नरेश टिकैत, दूसरी में सरदार वीएम सिंह, पंजाब किसान नेता गुरनाम सिंह चढ़ूनी, तीसरे में सरदार वीएम सिंह, चौथी में रालोद सुप्रीमो चौधरी जयंत सिंह और भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत, पांचवीं में इनेलो के राष्ट्रीय महासचिव अभय सिंह चौटाला, छठी में भाकियू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश टिकैत पहुंचे थे।
- मिल के वाइस प्रेजीडेंट सुशील चौधरी दे चुके हैं इस्तीफा
किसानों का धरना समाप्त नहीं होने के कारण मिल प्रशासन में भी खलबली मची रही। मिल के नहीं चलने के कारण मिल प्रशासन को भी नुकसान हो रहा था। जिसके कारण मिल के वाइस प्रेजीडेंट सुशील चौधरी दो दिन पहले ही इस्तीफा भी दे चुके हैं। उनके स्थान पर वाइस प्रेजीडेंट के पद पर प्रदीप सलार को तैनात किया गया।
- किसान यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सवित मलिक ने कहा कि किसानों ने मजबूती से लड़ाई लड़ी। उन्होंने किसानों को बधाई देते हुए चीनी मिल को किसानों की समझौते के अनुसार 14 दिन में भुगतान नहीं किया तो समझौते का पालन न करने पर किसान यूनियन किसानों की लड़ाई जारी रखेगी।
- सपा के कैराना लोकसभा प्रभारी प्रोफेसर सुधीर पंवार का कहना है कि पिछले साल के बकाया भुगतान की मांग कर रहे शामली मिल के गन्ना किसानों का 95 दिनों से चल रहा धरना बिना कोई भुगतान हुए समाप्त होने से भाजपा का किसान विरोधी चेहरा उजागर हो गया। किसानों ने समझदारी का परिचय देते हुए 1932 से चल रहे चीनी मिल को बंद होने से बचा लिया। इसके लिए किसानों की जितनी सराहना की जाए कम है।
- किसानों के साथ छलावा हुआ है। किसान दुखी है। किसानों का संपूर्ण बकाया भुगतान होना चाहिए था। अब किसान कैसे परिवार को चलाएगा। जल्द भुगतान की मांग की है। - यामीन खान, किसान
- किसान हित में हुआ समझौता
किसान राजबीर सिंह का कहना है कि समझौता किसान हित में है। यदि पहले समझौता होता तो मिल पहले से ही चल जाती और किसानों को परेशानी नहीं होती। इससे मिल मालिक और किसानों दोनों को फायदा होगा। मिल मालिक समझौते के अनुसार ही कार्य करें।
- एडीएम ने धरना समाप्त कराने में निभाई अहम भूमिका
धरना समाप्त कराने में एडीएम संतोष कुमार ने भी सेतु की भूमिका निभाई। वह 10 से अधिक बार खुद वार्ता करने के लिए किसानों के बीच पहुंचे और उन्हें समझाने का भरपूर प्रयास किया। एडीएम का कहना है कि मिल से किसानों का गन्ना पेराई हो सकेगा और किसान गेहूं की फसल की समय पर बुवाई कर सकेंगे।