- जनपद में द्वितीय ऑनलाइन लाॅटरी के माध्यम से 1573 ने किया था आवेदन
- लॉटरी में 845 का किया गया चयन, 763 छात्र-छात्राओं को स्कूल का आवंटन किया
- आवेदन में सौ से अधिक आवेदकों ने दूसरा शहर के स्कूलों का दिया नाम, निरस्त किए
संवाद न्यूज एजेंसी
शामली। आरटीई के तहत बुधवार की देर शाम काे द्वितीय लॉटरी निकाली गई, जिसमें 1573 में से 845 का चयन किया गया। इनमें से 763 छात्र-छात्राओं को स्कूल का आवंटन कर दिया गया, लेकिन चयनित होने के बाद भी 82 छात्रों को स्कूल नहीं मिल सका। अब शिक्षा विभाग इनको तीसरी लॉटरी में स्कूल आवंटन करने के लिए फाइल तैयार कर रहा है।
आरटीई के तहत गरीब परिवार के बच्चों को फ्री शिक्षा दी जाती है। इसके लिए नर्सरी व कक्षा एक में आवेदन किए जाते है। अभिभावकों ने फ्री शिक्षा का लाभ लेने के लिए द्वितीय लॉटरी में आवेदन किया था और इसमें 1573 आवेदन शिक्षा विभाग को प्राप्त हुए थे। लॉटरी में पहले आओ पहले पाओ के तहत चयनित किया जाता है। शिक्षा विभाग ने बुधवार की देर शाम को लॉटरी खोली और इसमें आवेदन सही मिलने के बाद 845 आवेदन स्वीकार कर लिए गए और उसके बाद 763 छात्र-छात्राओं को स्कूल का आवंटन कर दिया गया। लेकिन लॉटरी में नंबर आने के बाद 82 छात्र-छात्राएं दूसरी लॉटरी में स्कूल हासिल करने में विफल हुए। क्योंकि स्कूलों में कोई सीट खाली नहीं रही। अब उनको तीसरी लॉटरी में स्कूल देने के लिए शिक्षा विभाग तैयारी कर रहा है। इसके लिए उनकी फाइल तैयार कर रहा है, जिससे उन्हें स्कूलों का आवंटन कर दिया जाए।
आवेदक पात्र, लेकिन दूसरा शहर भरने पर आवेदन निरस्त
आरटीई में अपना शहर के वार्ड में स्कूल भरना होता है, लेकिन यहां तो आवेदकों ने अपना वार्ड के स्कूल को तो छोड़ दिया है और अपना शहर, कस्बा को छोड़कर दूसरे शहर के स्कूल का नाम भर दिया। करीब ऐसे आवेदन सौ थे, जिनको निरस्त किया गया। बताया गया कि इनमें कई आवेदन पात्र के योग्य थे, लेकिन दूसरा शहर का स्कूल होने के कारण उनको निरस्त किया गया। यदि वह अपने वार्ड का स्कूल भरते तो उनका दूसरी लॉटरी में नाम आ जाता।
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दूसरी लॉटरी में 845 आवेदकों का चयन किया गया और इनमें 763 बच्चों को स्कूल का आवंटन कर दिया गया। इसमें चयनित 82 बच्चों को स्कूल नहीं मिल पाया है उनको तीसरी लॉटरी में दे दिया जाएगा। इससे बच्चों के अभिभावकों काे परेशान होने की जरूरत नहीं है। तीसरी लॉटरी में बच्चों के अभिभावक अपने वार्ड के स्कूल का ही नाम भरे, ताकि उनका चयन किया जा सकें। - कोमल, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, शामली