शामली। सारस साहित्य समिति ने स्वामी विवेकानंद की जयंती धूमधाम के साथ मनाई। वक्ताओं ने कविताओं के माध्यम से उनके जीवन पर प्रकाश डाला।
शनिवार को सारस साहित्य समिति ने विवेकानंद की जयंती विराट काव्य रसधारा के साथ उत्साहपूर्वक मनाई। कार्यक्रम का आयोजन डाक्टर विपिन कौशिक के आवास पर आयोजित हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ कवि प्रीतम सिंह प्रीतम ने सरस्वती वंदना के साथ किया। सुनील टम्मी ने विवेकानंद को समर्पित दोहे प्रस्तुत किए। जिसमें संत विवेकानंद तुम शुभ संस्कृति का कोष, गूंजा दिया इस इस सृष्टि में भारत का जयघोष, अनथक यात्री ने कभी लिया नहीं विश्राम, दिशा दिशा के वक्ष पर लिखा तुम्हारा नाम प्रस्तुत किया। वहीं गीतकार देवेंद्र शर्मा ने गीत और गजल के माध्यम से समा बांधा। समझना है तो किसी के जज्बात को समझ, दिल में छिपे हुए ख्यालात को समझ, बुद बुदाते ओंठ दबे के दबे रह गए, ओंठ जो कह नहीं सके उस बात को समझ प्रस्तुत की। कवि प्रीतम सिंह प्रीतम ने कहा धर्म ही सबका रखवाला, धर्म ध्वजा को उच्च करो, गले लगाओ सब जगती को, नहीं किसी को तुच्छ करो कविता सुनाई। इसके साथ ही मनोज मित्तल ने भी अपनी रचना में कहा गीताधारी मैंने अपना दे दिया है दिल तुम्हें, ओ रे कांन्हा, कब समझोगे, दीदार के काबिल मुझे। वहीं, अरविंद, राकेश व मनोज वर्मा ने भी अपनी रचनाएं पढ़कर उनके जीवन प्रकाश डालकर सभी को उनके पद चिह्नों पर चलने का आह्वान किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता विपिन कौशिक व संचालन सुनील अरोरा ने किया।