शामली जिले के उपभोक्ताओं के लिए अच्छी खबर है। बंतीखेड़ा गांव में आधुनिक तकनीक वाला 400 केवीए का बिजलीघर का निर्माण जल्द ही प्रारंभ हो जाएगा। शासन से बिजलीघर निर्माण की स्वीकृति और प्रथम किश्त जारी हो गई है। पॉवर कारपोरेशन (ट्रांसमिशन) ने किसानों से करीब छह हेक्टेयर भूमि का बैनामा करा लिया है। बिजलीघर के बनने से जिले में बिजली कट और ओवरलोड की समस्या से निजात मिल जाएगी।
काफी समय से जिले में 400 केवीए बिजलीघर की स्थापना की मांग चल रही थी। फिलहाल जिले में 220 केवी का कंडेला बिजलीघर है। इसके अलावा 132 केवीए के करीब 11 बिजलीघर हैं। 400 केवीए बिजलीघर की स्थापना के लिए करीब एक साल से जमीन तलाशी जा रही थी। पूर्व में गांव मंसूरा और उसके बाद खोडसमा गांव में जमीन देखी गई थी, लेकिन विवाद के कारण जमीन खरीदने में दिक्कत आ गई थी।
कुछ दिन पूर्व ही शामली के गांव बंतीखेड़ा में बिजलीघर के लिए जमीन देखी गई और किसान भी अपनी जमीन का बैनामा कराने के लिए तैयार हो गए। इसके चलते साढ़े नौ करोड़ रुपये में करीब छह हेक्टेयर भूमि का बैनामा 23 मई को करा लिया गया है। इसके बाद पावर कार्पोरेशन ने जमीन की बाउंड्री का कार्य शुरू कराने को टेंडर निकाल दिए हैं। उत्तर प्रदेश पावर कार्पोरेशन (ट्रांसमिशन) के अधिशासी अभियंता रजनीश शर्मा ने बताया कि बंतीखेड़ा में बनने वाले 400 केवीए बिजलीघर पर करीब 1320 करोड़ रुपये खर्च होने प्रस्तावित हैं। प्रथम किश्त के रूप में धनराशि जारी होने पर जमीन का बैनामा करा लिया गया है। जमीन का बैनामा और बिजलीघर निर्माण का पूरा प्रस्ताव बनाकर शासन को भेज दिया गया है। शासन स्तर से ही बिजलीघर निर्माण की एजेंसी का निर्धारण होगा, जिसके बाद निर्माण शुरू कराया जाएगा। बिजलीघर का निर्माण करीब दो साल में पूरा हो जाएगा।
जीआईएस तकनीक वाला होगा बिजलीघर
अधिशासी अभियंता (ट्रांसमिशन) रजनीश शर्मा ने बताया कि यह बिजलीघर आधुनिक तकनीक गैस इंसुलेटिड सबस्टेशन (जीआईएस) पर आधारित होगा। अभी तक प्रदेश में ऐसा कोई बिजलीघर नहीं बना है। इस बिजलीघर के बनने पर शामली जिले में ओवरलोड की समस्या खत्म हो जाएगी, कट भी नहीं लगेंगे। पर्याप्त बिजली आपूर्ति मिलेगी तथा पड़ोसी जनपद मुजफ्फरनगर और सहारनपुर के नानौता क्षेत्र को भी यहां से बिजली दी जा सकेगी। उधर, बंतीखेड़ा में बनने वाले बिजलीघर को अलीगढ़ पावर ग्रिड से जोड़ा जाएगा। अधिशासी अभियंता ने बताया कि यह बिजलीघर मुजफ्फरनगर के 400 केवीए जौली बिजलीघर से भी बेहतर होगा। क्योंकि जौली बिजलीघर में जीआईएस तकनीक नहीं है।