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ऋषि दयानंद ने वेदों की सता को सदा सर्वोपरि माना:

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शामली। ऋषि बोध उत्सव के छठे दिन आर्य समाज के पुरोहित डॉक्टर रविदत्त आर्य ने वैदिक यज्ञ विधि विधान से संपन्न कराया।
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आर्य समाज के ऋषि बोध सप्ताह के छठे दिन मोहल्ला रेलपार निवासी रामकुमार के आर्य के आवास पर वैदिक यज्ञ एवं भजन प्रवचन के कार्यक्रम का आयोजन किया गया। बिजनौर से आए आर्य समाज के भजनोपदेशक कुलदीप आर्य ने कहा कि ऋषि दयानंद एक सन्यासी और महान चिंतक थे, उन्होंने वेदों की सत्ता को सदा सर्वोपरि माना। इस दौरान प्रभातफेरी निकाली गई। स्वामी दयानंद ने हिंदू धर्म में व्याप्त कुरीतियों व बुराइयों का खुलकर विरोध किया। उन्होंने महिलाओं को अधिकार दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अश्वनी आर्य ने कुलदीप आर्य के भजनों पर तबले से संगत दी। मौके पर प्रधान विनोद आर्य, मंत्री देवेंद्र देव आर्य, रविकांत आर्य, आर्य विद्यासभा के प्रधान राजपाल आर्य, मंत्री दिनेश आर्य, मुकेश चौधरी, नरेंद्र अग्रवाल, पूरण चंद आर्य, रामेश्वर दयाल आर्य, महेश विश्वकर्मा, मीरा वर्मा, मिथलेश आर्य, शारदा आर्य, नीलम आर्य, पूनम आर्य आदि उपस्थित रहे।
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