जलालाबाद। थाना भवन ब्लॉक में 29 ऐसे सरकारी विद्यालय हैं जहां अब तक सरकार फर्नीचर तक की सुविधा उपलब्ध नहीं करा पाई है। अब हालत यह है कि बच्चे जमीन पर बैठकर शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। जिससे उनका बीमार होने का भी खतरा बढ़ गया है।
खंड शिक्षा विभाग के आंकड़ों के अनुसार थानाभवन ब्लॉक में कुल 112 सरकारी विद्यालय हैं। जिनमें पंजीकृत 17 हजार 743 छात्र-छात्राएं शिक्षा ग्रहण करते हैं। ब्लॉक में ऐसे 29 सरकारी विद्यालय ऐसे है जिनमें बच्चों के बैठने के लिए फर्नीचर तक नहीं है। इन विद्यालयों में पंजीकृत 2050 छात्र-छात्राएं जमीन पर बैठकर पढ़ाई करने को मजबूर हैं। बच्चे बीमार न हो जाए इसकी चिंता किसी को नहीं है। सर्दी गर्मी अथवा बरसात सभी मौसम में बच्चे जमीन पर ही बैठते हैं। स्कूलों के स्टाफ का कहना है कि अनेकों बार वे अपने स्तर पर लिखित में भी शिकायत तमाम अधिकारियों से कर चुके हैं, लेकिन अभी तक किसी ने भी इसकी सुध नहीं ली है। संवाद
ग्राम पंचायतों की भी जिम्मेदारी
यदि किसी सरकारी विद्यालय में फर्नीचर की सुविधा उपलब्ध नहीं है तो विभाग के साथ ग्राम पंचायत की भी उतनी ही जिम्मेदारी होती है कि वह अपने बजट से प्रस्ताव पास कर स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों के लिए फर्नीचर की सुविधा उपलब्ध कराएं। लेकिन इन विद्यालयों की माने तो उनकी ग्राम पंचायतों ने बजट न होने का हवाला देते हुए फर्नीचर उपलब्ध कराने से हाथ खड़े कर दिए हैं।
इन सरकारी स्कूलों में नहीं फर्नीचर
आबादगढ़ पीएस, अलीपुरा पीएस, अंबेहटा याकूबपुर कंपोजिट, भनेड़ा उद्दा यूपीएस, डेरा ढाका पीएस, डेरा कांटा, डेरा कुटी, देवीपुरा, गढ़ीखाम नम्बर एक, इस्माइलपुर, जमालपुर, कादरपुर, काजीपुरा, किशोरपुर, कुतुबगढ़, मादलपुर नम्बर एक, महमूदगढ़, मनट पीएस, मनट यूपीएस, मरगूबगढ़, मारुखेड़ी, नागल नम्बर दो, नोजल एक, नोजल दो, पँवारखेड़ा, रसीदगढ़ दो, पलठेडी, सूरजपुर, वकीलगढ़।
ग्राम पंचायतों की भी जिम्मेदारी होती है कि वह अपने बजट से प्रस्ताव पास कर स्कूल में फर्नीचर उपलब्ध कराएं। लेकिन ग्राम सचिव अथवा प्रधान भी इससे हाथ खड़े कर चुके हैं। विभाग पूरा प्रयासरत है ताकि जल्द बच्चों को फर्नीचर की सुविधा उपलब्ध हो सके। -सीमा चौहान, खंड शिक्षा अधिकारी