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कैराना लोकसभा सीट पर तीसरी बार हसन परिवार को मिली करारी हार

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कैराना लोकसभा सीट पर तीसरी बार हसन परिवार को मिली करारी हार
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शामली। कैैैराना लोकसभा सीट पर हसन परिवार को इस बार भाजपा से तीसरी बार हार मिली है।
कैराना लोकसभा सीट की इतिहास को देखे तो कैराना का हसन परिवार वर्ष 1984 में चौधरी अख्तर हसन कांग्रेस से पहली बार सांसद बनकर राजनीति में उभरे थे। चौधरी अख्तर हसन के बेटे ने वर्ष 1996 में कैराना लोकसभा सीट से सपा से चुनाव जीतकर अपने पिता की राजनीति विरासत को संभाला था। सांसद मुनव्वर हसन लोकसभा, राज्यसभा, विधानसभा, विधान परिषद के सदस्य रहे है। वह वर्ष 2004 में मुजफ्फरनगर से लोकसभा चुनाव से सपा- रालोद गठबंधन में सांसद चुने गए। वर्ष 1999 मेें सपा से कैराना लोकसभा चुनाव लड़े, मगर भाजपा के दिग्गज नेता व पूर्व राज्यपाल वीरेंद्र वर्मा के सामने चुनाव हार गए थे। मुनव्वर हसन के निधन के बाद उनकी विरासत को उनकी पत्नी तबस्सुम बेगम ने वर्ष 2009 में संभाला। बसपा से वह पहली बार कैराना लोकसभा चुनाव मेें भाजपा प्रत्याशी हुकुम सिंह को हराकर सांसद चुनी गई। वर्ष 2014 में कैराना लोकसभा चुनाव में भाजपा प्रत्याशी हुकुम सिंह और हसन परिवार के सपा प्रत्याशी नाहिद हसन से हुआ। मोदी लहर में हसन परिवार के नाहिद हसन को हराकर हुकुम सिंह भाजपा के सांसद बन गए थे। इस बार कैराना लोकसभा चुनाव में रालोद- बसपा, सपा गठबंधन प्रत्याशी के रूप में तबस्सुम हसन को भाजपा प्रत्याशी प्रदीप चौधरी के सामने हार का मुुंह देखना पड़ा।
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