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प्रेम परमात्मा का दूसरा रूप

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थानाभवन।
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भागवत कथा के पांचवें दिन कथा व्यास सुमित कृष्ण ठाकुर ने कहा कि प्रेम परमात्मा का दूसरा रूप है। जहां प्रेम होता है वहीं परमात्मा निवास करते हैं।
कथा व्यास सुमित कृष्ण ठाकुर ने कहा कि जो मनुष्य के अंदर हरदम सवार रहते हैं। अच्छे विचार अच्छाई की ओर खींचते हैं। बुरे विचार बुराई की ओर खींचते हैं। इसलिए मन को हमेशा अच्छे विचारों की ओर प्रेरित करना चाहिए। इसका सबसे सरल साधन सत्संग और आचरण है। उन्होंने सतगुरू की पहचान कराते हुए कहा जो आपके निजस्वरूप की पहचान करा दे ओर आगे बढ़ने की प्रेरणा दे। जिससे आपकी प्रतिभा पूर्ण रूप से विकसित हो सके वही सतगुरू स्वरूप है। आज की कथा में श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं माखन चोरी, गोवर्धन धारण की लीलाओं की अनेक मनमोहक झांकियां भी प्रस्तुत की गयी। कथा में मुख्य यजमान मदनलाल सैनी व सुनीता सैनी रहे। कमल सैनी, अनीता सैनी, विधी सैनी, अनीता गुप्ता, प्रणव गोयल, उदित गोयल, अमित गोयल, रजत कांबोज, पोपी, रणवीर सिंह, शोभाराम, शुभम सिंघल, रूपराम आदि रहे।
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