झिंझाना। मौसम के बदलाव के चलते सीएचसी में प्रतिदिन 300 मरीज आ रहे है। इनमें एलर्जी, मौसमी बुखार, खांसी, नजला, जुकाम के मरीजों की संख्या अधिक है। यहां आने वाले मरीजों को खांसी के लिए पीने के लिए कोई सीरप नहीं दिया जाता। छाती में जलन के नाम पर मात्र ओसिड का कैप्सूल देकर चलता कर दिया जाता है। इसके अलावा एलर्जी के नाम पर शरीर में लगाने वाली कोई दवाई नहीं दी जा रही है। मात्र टेबलेट दी जा है। मरीज, रूकसाना, शबाना, सतपाल, शकीला, शबीना, रूकसार आदि ने बताया कि यहां पर मरीजों को गर्मी में पीने के लिए पानी भी नहीं है। दवाइयों के लिए भी स्टोर से लेकर आने के लिए कहा जा रहा है। लखनऊ से आई टीम में भुवनेश माथुर और शिमी जैदी ने बताया कि वह सीएचसी का टेक्निकल मुआयना करने आए हुए है। यहां जो समस्याएं है, उनको शासन तक पहुंचाया जाएगा। निरीक्षण के बाद दोनों अधिकारी लौट गए। चिकित्साधिकारी ऊन डाक्टर लेखराम ने बताया कि एक्सपायर दवाइयों को अधिकारियों संज्ञान में लाकर उन्हें जमीन में गड्ढ़ा खोद कर दबाया जाता है। अगर झिंझाना सीएचसी में उन्हें जलाया गया है। तो इसकी विभागीय जांच कराकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।