झिंझाना।
मनुष्य को अपना जीवन अगर सफल बनाना है तो अपने स्वभाव को बदलना होगा। उक्त वचन सत्संग भवन में आयोजित सत्संग संध्या में स्वामी स्वरूपानंद जी महाराज ने कहे। बताया कि मनुष्य अगर आत्म निरीक्षण चिंतन कर अपनी इंद्रियों को वश में रखकर सुखों का त्यागकर गुरू व भगवान का स्मरण करे तो आत्म शांति प्राप्त होगी। भौतिक सुख को प्राप्त करने में मनुष्य अपना पूरा जीवन बर्बाद कर देता है। कभी कभी कुंठा में आत्म हत्या जैसा आत्मघाती कदम उठा देता है, जो गलत है। ईश्वर ने समकर्म करने के लिए यह जीवन दिया है। इसका सदुपयोग करने से ही समाज व इंसानियत की भलाई होगी। स्वामी ने श्रद्धालुओं को अपने जीवन में धन व योग को समाहित करने पर भी बल दिया।