तिलहर। आर्य समाज में आयोजित वैदिक विचार गोष्ठी में जितेंद्र आर्य ने कहा कि यज्ञ से वर्षा और वर्षा से अन्न की उत्पत्ति होती है। अन्न सभी प्राणियों के जीवन का आधार है। इसलिए हम सभी को यज्ञ अवश्य करना चाहिए।
कहा कि वेदों में यज्ञ को देवताओं का मुख कहा गया है। यज्ञ में डाला गया पदार्थ अणुओं और परमाणुओं में विभाजित होकर संपूर्ण चर-अचर जगत को प्राप्त हो जाता है। यज्ञ पर्यावरण प्रदूषण को दूर करने में सहायक है। कहा कि हमारे सभी महापुरुष भगवान राम, कृष्ण, ऋषि और मुनि सभी प्रतिदिन यज्ञ किया करते थे। यज्ञ करने से वातावरण प्रतिकूल नहीं होता था और समय पर वर्षा होती थी। आज इस परंपरा को पुनर्स्थापित करने की आवश्यकता है।
पं. गिरीश शर्मा वैदिक ने कहा कि घर-घर यज्ञ होने चाहिए। आर्य समाज इस दिशा में लगातार प्रयासरत है। उन्होंने ईश्वर भक्ति का भजन सुनाकर सभी को भावविभोर कर दिया। कार्यक्रम का शुभारंभ यज्ञ के साथ हुआ। इस अवसर पर ओमशंकर आर्य, दासीराम आर्य, नन्हेंलाल गंगवार, लोकेश कुमार, विमल आर्या, अमित मौर्य, विष्णु मौर्य आदि श्रद्धालु उपस्थित रहे।