जलालाबाद (शाहजहांपुर)। पहाड़ों पर लगातार बारिश से रामगंगा नदी का जलस्तर काफी बढ़ गया है। इससे कोलाघाट होते हुए कलान-मिर्जापुर का सफर जोखिम भरा हो गया है। उफनाई नदी को मोटर बोट से पार करना भी जोखिम भरा है। अभी तक कोलाघाट के नवनिर्मित पुल से आवागमन शुरू नहीं किया जा सका है।
पिछले साल 29 नवंबर को एक पिलर धंसने के बाद कोलाघाट पुल का एक हिस्सा तीन टुकड़ों में बंट गया था। इससे जलालाबाद से मिर्जापुर-कलान का आवागमन बंद हो गया था। वैकल्पिक व्यवस्था के रूप में लोगों ने पुल के नीचे कच्चे रास्ते से होते हुए रामगंगा नदी को नाव से पार करना शुरू कर दिया। पीडब्लूडी ने पैंटून पुल बनाकर लोगों को थोड़ी राहत दी। करीब दस महीनों के दौरान इस वैकल्पिक आवागमन में असुविधाओं को कम करने के लिए पीडब्ल्यूडी ने अनेक प्रयास किए लेकिन कोई न कोई समस्या आड़े आती रही। बरसात के मौसम में पैंटून पुल भी हटा दिया गया है। कुछ दिन से रामगंगा के उफनाने के बाद विभाग ने रेतीले रास्ते पर डाली गई लोहे की प्लेट हटा दी हैं। इससे आवागमन में लोगों की दिक्कत और बढ़ी है। नदी के जलस्तर में हुई बढ़ोत्तरी ने जोखिम बढ़ा दिया है। लोग मोटरबोट में बाइक रखकर नदी पार कर रहे हैं। पहले भी कई बार मोटर बोट पलटती रही है। तब पानी कम होने के कारण लोग आसानी से बाहर आ जाते थे। कोलाघाट पर गोताखोर या अन्य व्यवस्था न होने से भी जानमाल का खतरा बना हुआ है। अब कोला पुल के पास केवल रामगंगा नदी का ही बहाव है पर बहगुल नदी का पानी भी इसी में आता है। इससे पानी तेजी से बढ़ता है।
एक महीने से ज्यादा लगेगा वक्त
कोलाघाट पुल के क्षतिग्रस्त हिस्से में शेष बची दायें साइड की रेलिंग बनाने का काम पूरा हो चुका है। सोमवार को इस रेलिंग की फिनिशिंग का काम किया जा रहा था। अब क्षतिग्रस्त हिस्से के सभी कार्य पूरे हो चुके हैं पर पुल से यातायात कब तक शुरू होगा, इसे लेकर सेतु निगम के अधिकारी साफतौर से कुछ भी बताने से बच रहे हैं। निगम के डिप्टी प्रोजेक्ट मैनेजर बृजेंद्र मौर्य ने बताया कि अभी निर्माण से जुड़े कई तरह के कार्य बाकी हैं। इनमें एक माह या उससे ज्यादा का समय लग सकता है।
लोगों की बात
चंदिउरा बहादुरपुर निवासी रामरहीस ने बताया कि कलान क्षेत्र के गांव पिलुआ के सरकारी स्कूल में शिक्षक तैनात हैं। स्कूल घर से करीब 30 किमी दूर है। कोलाघाट के रास्ते आने-जाने से ही टाइम से स्कूल पहुंच पाते हैं। नदी पार करना काफी जोखिम भरा है। जलालाबाद के रहने वाले सुजीत कुमार ग्राम पंचायत जरीनपुर में सफाई कर्मचारी हैं। सुजीत ने बताया कि पहले रास्ते में भले ही दिक्कत हो लेकिन नदी में पानी कम होने के कारण उसे पार करने में डर नहीं लगता था। अब डर लगता है। जलालाबाद निवासी रिंकू श्रीवास्तव ने बताया कि नदी पार कलान व मिर्जापुर क्षेत्र में तमाम लोग रोज आते-जाते हैं। पुल बनकर तैयार है। प्रशासन को लोगों की परेशानी के मद्देनजर पैदल और बाइक सवारों को निकलने देना चाहिए। जलालाबाद निवासी सिमरन गुप्ता ने बताया कि वह मिर्जापुर के शिवमंगल सिंह डिग्री कॉलेज में बीएससी की छात्रा हैं। अभी पेपर चल रहे हैं। भाई के साथ बाइक से जाती हैं। नाव में सवारियां और बाइक भरी होती हैं। नदी में पानी बढ़ने के बाद अब उसे पार करने में काफी डर लगता है।