शाहजहांपुर। यदि आप जिले से गुजरने वाले स्टेट और नेशनल हाईवे पर सफर कर रहे हैं तो सावधान। हादसों के लिए कुख्यात दस जगहों पर तो विशेष सतर्कता बरतें, नहीं तो जान गंवानी पड़ सकती है। दरअसल यातायात पुलिस ने जिलेभर में दस ऐसे स्थानों को चिह्नित किया है, जहां सबसे ज्यादा हादसे होते हैं। इनमें नेशनल हाईवे पर चार और स्टेट हाईवे पर छह ब्लैक स्पॉट हैं।
पुलिस और लोक निर्माण विभाग मिलकर पहले वहां पर हादसे अधिक होने की वजह समझेंगे, उसके बाद उन वजहों को दूर करेंगे। सड़क पर गड्ढे भरे जाएंगे, स्पीड ब्रेकर, साइन बोर्ड और सफेद पट्टी लगाई जाएंगी। यातायात विभाग ने नेशनल हाईवे पर चार ब्लैक स्पॉट चिह्नित किए हैं। रोजा में जमुका टी-प्वाइंट ब्लैक स्पॉट है। दो वर्ष पहले यहां एक ही हादसे में 17 लोगों की मौत हो गई थी। ब्लैक स्पॉट पर 2019 में आठ हादसों में 23 लोगों की जान गई थी। 2021 में दो हादसों में दो की मौत हुई। रामचंद्र मिशन क्षेत्र के हरदोई बाईपास ब्लैक स्पॉट पर 2019 में चार हादसे हुए। 2020 में छह हादसों में एक की मौत हुई। 2021 में छह हादसों में दो की मौत व तीन घायल हुए हैं।
तिलहर में नगरिया मोड़ वर्षों से सबसे खतरनाक ब्लैक स्पॉट माना गया। यहां पर 2019 में चार हादसों में चार की मौत हुई, जबकि दो लोग घायल हुए। 2020 में तीन हादसों में एक की मौत व दो घायल, 2021 में चार हादसों में चार की मौत व पांच घायल हुए। कटरा में खैरपुर में 2019 में ब्लैक स्पॉट पर तीन की मौत हुई। 2020 व 21 में दो लोगों की हादसों में जान चली गईं।
स्टेट हाईवे पर छह प्वाइंट सबसे ज्यादा खतरनाक
जलालाबाद में कोलागांव से कोला मोड़ सबसे ज्यादा खतरनाक है। यहां पर 2019 में चार हादसों में एक की मौत व दो लोग घायल हुए। 2020 में छह हादसों में पांच की मौत व दो घायल हुए। 2021 में चार हादसों में दो की मौत व तीन लोग चोटिल हुए। मिर्जापुर में जरियनपुर टी-प्वाइंट के पास 2019 से 2021 तक 16 हादसे हुए। दस लोगों ने अपनी जान गंवाई और नौ लोग घायल हुए। अल्हागंज में हुल्लापुर चौराहे के पास भी ब्लैक स्पॉट है। यहां पर तीन साल में आठ हादसों में पांच लोगों की मौत व पांच लोग घायल हुए। कांट में ददरौल में पिपरौला मोड़ तक 2019 में 14 हादसे हुए। इसमें नौ लोगों की मौत हो गई। 10 लोग घायल हुए। 2020 में दस हादसों में चार लोगों की मौत व छह लोग घायल व 2021 में पांच हादसों में तीन लोगों की मौत और चार लोग घायल हुए। इस तरह कांट का ही जमौर मोड़ व निगोही का मिश्रीपुर गांव भी ब्लैक स्पॉट है।
पहले के 18 ब्लैक स्पॉट खत्म किए
जिले में पहले 18 ब्लैक स्पॉट को चिह्नित कर आवश्यक साइन बोर्ड, रिफलेक्टर बोर्ड, स्पीड ब्रेकर आदि बनवाए गए। उसके बाद वहां पर हादसे काफी कम हो गए। वर्ष 2019 से 2021 के बीच हादसों को देखते हुए दस नए ब्लैक स्पॉट का चिह्नीकरण किया गया। यहां पर हादसों पर ब्रेक लगाने के लिए कार्रवाई की जा रही है।
51 दुर्घटना आशंकित स्थल चुने
जिले में आए दिन होने वाली दुर्घटनाओं को देखते हुए 51 दुर्घटना आशंकित स्थल चुने गए हैं। यहां पर हादसों पर रोक लगाने के लिए कार्रवाई शुरू की गई। यहां पर स्पीड ब्रेकर और साइन बोर्ड समेत कई कार्रवाई की जा रही है। अधिकारियों के मुताबिक 42 स्थलों को व्यवस्थित किया जा चुका है।
पांच वर्षों में हादसों में गंवाई जान
वर्ष मृतक
2017 344
2018 342
2019 421
2020 342
2021 362
जिले में दस ब्लैक स्पॉट को चिह्नित किया गया है। इन जगहों पर हादसों में कमी लाने के लिए सड़क पर सफेद पट्टी, साइन बोर्ड आदि को लगाया जाएगा। उसके लिए पीडब्ल्यूडी से वार्ता की गई। कुछ जगहों पर स्पीड ब्रेकर भी बनाए जाएंगे। -अखंड प्रताप सिंह, सीओ यातायात।
कुछ माह पहले राष्ट्रीय राजमार्गों पर दुर्घटनाओं में कमी लाने के लिए शासन स्तर से राड सेफ्टी ऑडिट कराया गया। इस दौरान दस स्थानों को ब्लैक स्पॉट चिह्नित किए थे। शहर में कचहरी तिराहा और लोधीपुर में खन्नौत पुल के पास चिह्नित ब्लैक स्पॉट के पास दुर्घटनाएं रोकने को रंबल स्ट्रिप बनाकर साइन बोर्ड लगवाए। ब्लैक स्पॉट के शेष आठ स्थानों पर यही काम भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) को अपने स्तर से कराना होगा। -राजकुमार पिथौरिया, अधिशासी अभियंता, लोनिवि (प्रांतीय खंड)