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Shahjahanpur News: विष्णु स्वरूप भारती की टीम ने हिला दी थी अंग्रेजी हुकूमत

Thu, 15 Aug 2024 03:31 AM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहाँपुर
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तुलापुर के स्वतंत्रता सेनानी प्रेमशंकर शुक्ला। स्रोत परिजन
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खुटार। ब्लॉक के गांव तुलापुर का जंग-ए-आजादी में खास योगदान रहा है। आठ स्वतंत्रता सेनानी इसी गांव ने दिए, लेकिन आजादी के मतवालों की याद में बना पार्क और चबूतरा आज बदहाल पड़ा है।
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सन 1940 के आसपास तुलापुर गांव आजादी के दीवानों की गतिविधियों का खास केंद्र था। हदीरा गांव के विष्णु स्वरूप भारती उस समय तुलापुर आए। वह अविवाहित थे और उनके मन में देश के लिए कुछ करने का जज्बा था। यहां उन्हें सात साथी और मिल गए। वह इसी गांव की माटी के होकर रह गए। प्रेमशंकर शुक्ला (बंगाली बाबू), बनवारीलाल शुक्ला, यदुनंदन प्रसाद शुक्ला, काशीप्रसाद शुक्ला, अयोध्या प्रसाद मिश्रा, जगदीश प्रसाद शुक्ला और चंद्रभाल के साथ विष्णु स्वरूप भारती की टीम क्षेत्र के बाजारों और सार्वजनिक स्थानों पर अंग्रेजी साम्राज्य के खिलाफ नारेबाजी और जन जागरण करने लगी। रेल की पटरियां उखाड़ डालीं। रेलवे के टेलीफोन तार काट दिए।
भारती इतना जोशीला भाषण देते थे कि लोग उनके साथ आंदोलन में कूद पड़ते थे। उनकी टीम ने अंग्रेजी हुकूमत की नाक में दम कर दिया था। पुलिस ने विष्णु स्वरूप और उनके साथियों को चार अप्रैल 1941 को गिरफ्तार कर 38 (1) ए डीआईआर के तहत जेल भेज दिया। सभी को छह-छह माह का कारावास और 75-75 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई। उस समय शाहजहांपुर के जेल अधीक्षक बीए जाफरी थे। 18 जुलाई 1941 को सभी को लखनऊ जेल भेज दिया गया।
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बताते हैं कि बनवारी लाल इस टीम में सबसे ज्यादा उग्र थे। जेल अधिकारी भी उनसे त्रस्त थे। जेल में ही उन्हें कोई जहरीला पदार्थ दे दिया गया। जेल से छूटने के कुछ ही दिन बाद उनकी मौत हो गई थी। स्वतंत्रता के 25वें वर्ष 1972 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने इन सपूतों को ताम्रपत्र भेंटकर उनके योगदान को सम्मान दिया था। संवाद



सेनानियों की याद में बना पार्क बदहाल
- तुलापुर गांव में स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की याद में 1972 में बनाया गया पार्क दुर्दशा और उपेक्षा का शिकार होकर रह गया है। ग्रामीण बताते हैं कि गांव के स्कूल में पार्क बनाकर उसमें चबूतरे का निर्माण कर लाट लगवाई गई थी। लाट में स्वतंत्रता आंदोलन में शामिल गांव के सभी पुरोधाओं के नाम अंकित थे। देखरेख के अभाव में पार्क और लाट टूट गए। अब इस स्थान पर केवल चबूतरा शेष है। पार्क बनवाने के लिए शासन तक कई बार पत्राचार किया, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला। यहां स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के परिवार वाले भी अपनी उपेक्षा से काफी परेशान हैं। वर्ष 2023 में यहां एक शिलापट लगवाया गया है, जिसमें स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के नाम अंकित हैं।

कई बार मांग के बाद भी द्वार की नहीं हो रही मरम्मत
खुटार के तिकुनिया चौराहे पर स्वतंत्रता संग्राम सेनानी प्रेमशंकर शुक्ला की स्मृति में द्वार बना हुआ है। कई बार ओवरहाइट वाहनों के कारण द्वार क्षतिग्रस्त होता रहता है। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी के परिजन तमाम बार स्मृति द्वार के पुनर्निर्माण की मांग कर चुके हैं, लेकिन अभी तक ध्यान नहीं दिया गया है।

तुलापुर के स्वतंत्रता सेनानी प्रेमशंकर शुक्ला। स्रोत परिजन

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