शाहजहांपुर। जिले के आयुर्वेदिक अस्पताल भी अव्यवस्थाओं का शिकार हो गए हैं। आयुर्वेदिक अस्पतालों में चूरन, तेल समेत कई दवाइयों को उधार की व्यवस्था से उपलब्ध कराया जा रहा है। अधिकारियों की मानें तो अक्तूबर से दवाई की सप्लाई उपलब्ध नहीं हो सकी है। लोकल खरीद के लिए भी निदेशक को भेजे पत्र का जवाब नहीं आया है। इसी तरह स्टाफ भी पर्याप्त नहीं होने से मरीजों को दुश्वारियों से दो-चार होना पड़ता है।
पुराने जिला अस्पताल के परिसर समेत जिले में करीब 55 आयुर्वेदिक अस्पतालों का संचालन किया जाता है। इन अस्पतालों में सबसे बड़ी किल्लत दवा की है। लखनऊ से अक्तूबर माह में दवा की सप्लाई की गई थी। इसके बाद से वहां से कोई संज्ञान नहीं लिया गया। इसी तरह 23 तरह की दवाओं की लोकल स्तर पर खरीद की व्यवस्था भी जमीनी स्तर पर नहीं उतर सकी हैं। क्षेत्रीय आयुर्वेदिक अधिकारी डॉ. राजीव कुमार के अनुसार, दवा की खरीद के लिए टेंडर के लिए डायरेक्टर से अनुमति लेनी होती है। इसके लिए पत्र भेजने के बाद भी कोई संज्ञान नहीं लिया गया।
जुगाड़ से चल रही व्यवस्था
दवा की आपूर्ति न होने के कारण जुगाड़ से अस्पतालों का संचालन किया जा रहा है। पुराने जिला अस्पताल में हर दिन 100 से अधिक मरीज दवा लेने आते हैं। ऐसे में जहां कम मरीज आते हैं, उन अस्पतालों से दवाई मंगाकर यहां उपलब्ध करा दी जाती है।
वार्ड व्यॉय के 50 फीसदी पद रिक्त
आयुर्वेदिक अस्पतालों में स्टाफ की भारी कमी है। चिकित्सा अधिकारी के अवकाश या बैठक में जाने की स्थिति में दूसरे अस्पतालों से डॉक्टर को बुलाकर मरीजों का उपचार कराया जाता है। इसके चलते ग्रामीण क्षेत्र के अस्पतालों में व्यवस्था पटरी से उतरी हुई है। शहर के केंद्र में पर्याप्त स्टाफ नहीं है। हालांकि, यहां पर स्टाफ नर्स की नियुक्ति है। जबकि वार्ड ब्वॉय के 50 प्रतिशत पद रिक्त हैं।
दवा की टेंडर की अनुमति के लिए डायरेक्टर को पत्र भेजा है। संभावना है कि माह के अंत तक टेंडर प्रक्रिया से दवा खरीद ली जाएगी। सरकार से होने वाली दवाई की सप्लाई आने की जानकारी नहीं है। डॉ.राजीव कुमार, क्षेत्रीय आयुर्वेदिक अधिकारी
पहली बार आए दवा लेने
-सीने में काफी दर्द हो रहा है। अंग्रेजी दवा फायदा नहीं करती है। इसलिए आयुर्वेदिक अस्पताल में आए हैं। काफी समय के बाद भी डॉक्टर ने नहीं बुलाया है। ओपीडी का समय भी खत्म होने के कारण दवा मिलना मुश्किल लग रही है। -गफ्फार, मोहल्ला बिजलीपुरा