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तिलहर सीएचसी : यहां इलाज नहीं होता, सिर्फ रेफर किए जाते हैं घायल

Fri, 24 Feb 2023 12:59 AM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहाँपुर
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तिलहर। लखनऊ-दिल्ली राष्ट्रीय राजमार्ग पर अक्सर एक्सीडेंट होते रहते हैं। मीरानपुर कटरा से बंथरा के बीच होने वाले हादसों के घायलों को तिलहर सीएचसी पर लाया जाता है लेकिन यहां ऑर्थोपेडिक सर्जन न होने के कारण उन्हें मेडिकल कॉलेज रेफर किया जाता है। ऐसे में अक्सर गंभीर मरीज 22 किलोमीटर दूर राजकीय मेडिकल कॉलेज पहुंचने से पहले ही रास्ते में दम तोड़ देते हैं। यहां छह महीने बीतने के बाद भी ब्लड यूनिट को शासन से मंजूरी नहीं मिल सकी है। डेढ़ महीने में 47 गंभीर घायलों को यहां से राजकीय मेडिकल कॉलेज रेफर किया जा चुका है।
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कटरा से लेकर तिलहर क्षेत्र के करीब 40 किलोमीटर के दायरे में नेशनल हाईवे पर होने वाले हादसों के घायलों को तिलहर सीएचसी ही लाया जाता है। तिलहर सीएचसी पर 30 बेड की व्यवस्था है। यहां लगभग 20 वर्षों से ऑर्थोपेडिक सर्जन न होने के कारण हादसे में घायल मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। हाईवे होने के कारण यहां लगभग रोज ही हादसे होते हैं। कई गंभीर मरीज सीएचसी पहुंचने के बाद दम तोड़ देते हैं। फार्मासिस्ट हरिशंकर ने बताया कि जनवरी से लेकर 20 फरवरी तक यहां से 47 एक्सीडेंटल मरीजों को मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया है। वर्ष में लगभग 350 से 400 हादसे में घायल मरीजों को रेफर किया जाता है। इसके बावजूद संबंधित विभागीय अधिकारी यहां पर आर्थोपेडिक सर्जन की नियुक्ति के प्रति गंभीर नहीं है।
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शुरू नहीं हो सकी ब्लड यूनिट
सीएचसी में ब्लड यूनिट खोलने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। ब्लड स्टोरेज रेफ्रिजरेटर मशीन छह महीने पहले सीएचसी पर आ चुकी है। लैब तकनीशियन की पोस्टिंग भी दो महीने पहले हो चुकी है, लेकिन अब तक शासन से ब्लड स्टोरेज का अप्रूवल नहीं मिल सका है। इसके कारण ब्लड बैंक की सुविधा यहां नहीं शुरू हो सकी है। ऑपरेशन के दौरान यहां रक्त की आवश्यकता पड़ने पर मरीज को रेफर कर दिया जाता है।
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वर्जन
ऑर्थोपेडिक सर्जन सहित चिकित्सकों के कई पद खाली हैं। इसके कारण परेशानी उठानी पड़ती है। हादसों में गंभीर घायलों को रेफर करना मजबूरी है। शासन से अप्रूवल मिलते ही ब्लड यूनिट शुरू कर दी जाएगी। - डॉ. करन सिंह, सीएचसी प्रभारी
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