पुवायां (शाहजहांपुर)। सिंधौली में हाईवे किनारे बाघ काफी देर तक घूमता रहा। एक व्यक्ति ने बाघ की फोटो भी खींची है। मुआयने के बाद वन अधिकारियों ने भी बाघ के सिंधौली में घूमने की पुष्टि की है, इससे लोगों में दहशत है।
सिंधौली थाना क्षेत्र के गांव चंदपई, कोटावारी, पिलखना, मजरा, सिसैया, बढ़ेला, किरतापुर, महाऊ दुर्ग के गांवों के पास जनवरी से एक बाघ देखा जा रहा है। आठ माह से वनकर्मी लोगों को जागरूक करने के लिए पंफलेट बांटकर कर्तव्य पूरा कर रहे हैं। बाघ अब तक कई वन्य पशुओं व बकरे आदि को मार चुका है। एक अगस्त को बाघ ने गांव श्यामपुर के पास एक बकरे को मार डाला था। दो अगस्त को गांव कोटावारी के पास एक घुमंतू पशु पर हमला कर घायल कर दिया था। बाघ कोटावारी के पास से गांव सिसैया तक घूम रहा है।
शुक्रवार रात बाघ सिंधौली कस्बे के पास जा पहुंचा और शाहजहांपुर पलिया हाईवे के किनारे घूमता रहा। कुत्तों के भौंकने और आहट होने पर एक व्यक्ति ने बाहर देखा तो बाघ को देखकर शोर मचा दिया। उसने बाघ के फोटो भी खींचे। शोर होने पर बाघ हाईवे से खेतों की ओर चला गया। सिंधौली के पास बाघ होने की जानकारी से लोग दहशत में हैं। लोगों का कहना है कि वन विभाग के अधिकारी लापरवाही बरत रहे हैं। आठ महीने से बाघ क्षेत्र में घूम रहा है, लेकिन उसे पकड़ने का प्रयास नहीं किया जा रहा है। ऐसे में कभी बड़ी घटना हो सकती है।
गन्ने की कटाई पर और बढ़ेगी समस्या
बाघ गन्ने के खेतों में छिपा रहता है और वहीं शिकार भी करता है। कुछ ही दिन में गन्ने की पेराई के लिए कोल्हू शुरू होने वाले हैं। गन्ने की कटाई शुरू होने पर समस्या और बढ़ जाएगी। बाघ के छिपने का स्थान कम होता चला जाएगा। ऐसे में गन्ना काटते समय बाघ किसी पर हमला भी कर सकता है। गन्ने की छिलाई से पहले बाघ को पकड़ने का प्रयास नहीं होने से बड़ी घटना का अंदेशा है।
चंदपई के पास ज्यादा है आवाजाही
बाघ ज्यादातर गांव चंदपई के पास शारदा नहर की खादर में बना रहता है। यहां पानी की भरपूर व्यवस्था है। साथ ही पानी पीने आने वाले पशुओं को भी बाघ शिकार बना लेता है। इस कारण बाघ इस क्षेत्र में ज्यादा रहता है। जानकारों की मानें तो सिंधौली कस्बे के पास बाघ पहली बार गया है।
सिंधौली के एक व्यक्ति ने बाघ का फोटो मुहैया कराया है। बाघ सिंधौली क्षेत्र में ही है। वनकर्मी लगातार निगरानी कर रहे हैं। लोग भी सतर्कता बरतकर सहयोग करें और गन्ने आदि के खेत में अकेले न जाएं। - रमाकांत सक्सेना, रेंजर सिंधौली