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18 कैमरों से की जा रही बाघ की निगरानी

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बाघ को पकड़ने के लिए लगाया पिंजड़ा - फोटो : POWAYAN
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पुवायां। गांव सिसैया और आसपास के गांवों के खेतों में घूम रहे बाघ की निगरानी के लिए 18 इंफ्रारेड कैमरे लगाए गए हैं। एक पिंजड़ा भी लगाया गया है, लेकिन बाघ पिंजड़े के पास नहीं गया है।
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गांव चंदपई, कोटावारी, पिलखना, मजरा, सिसैया, बढ़ेला, किरतापुर, महाऊ दुर्ग के आसपास कई माह से एक बाघ देखा जा रहा है। लोग कई बार वन अधिकारियों से बाघ देखे जाने की शिकायत कर चुके हैं। कई माह पूर्व कैमरे, पिंजड़ा आदि लगाकर बाघ को पकड़ने का प्रयास भी किया गया, लेकिन सफलता नहीं मिल सकी थी। इसके बाद कुछ दिन तक बाघ दिखना बंद हो गया, लेकिन अब रोजाना बाघ देखा जा रहा है।
ग्रामीणों ने बताया कि गांव चंदपई के पास तालाब में बाघ ने जनवरी से ठिकाना बना रखा है। बाघ गन्ने के खेतों में घूमता रहता है। वन विभाग की टीम ने भी क्षेत्र में बाघ होने की पुष्टि की है और बाघ के मूवमेंट पर नजर रखने के लिए 18 कैमरे लगाए हैं। चंदपई तालाब के पास एक पिंजड़ा भी लगाया गया है। रविवार को भी वन विभाग की टीम रेंजर रमाकांत सक्सेना के नेतृत्व में क्षेत्र में घूमती रही। लोगों को जागरूक करने के लिए पंफलेट भी वितरित किए गए।
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किसानों को बड़ा खतरा
किसान रामचंद्र, बहोरनलाल, दिनेशचंद्र आदि ने बताया कि कई स्थानों पर गन्ने के पास धान की फसल खड़ी है। धान में सिंचाई, निराई, खाद डालते समय बाघ के हमले की आशंका से किसान बेहद परेशान हैं। बाघ जनवरी से देखा जा रहा है। पहले गन्ना छोटा था, तब मामले को गंभीरता से नहीं लिया गया। अब गन्ना काफी बड़ा हो चुका है। गन्ने में नीलगाय, खरगोश, सुअर, सियार आदि की बहुतायत है, जिस कारण बाघ को शिकार आसानी से मिल जाता है। यही कारण है कि बाघ यहां से नहीं जा रहा है।
सिसैया और आसपास 18 कैमरे लगाए गए हैं। एक पिंजड़ा भी लगवाया गया है। मैं खुद भी वनकर्मियों के साथ लगतार भ्रमण पर हूं। लोगों को भी जागरूक किया जा रहा है। -रमाकांत सक्सेना, रेंजर सिंधौली रेंज
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