शाहजहांपुर। विशेष न्यायाधीश अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण गरिमा सिंह ने हत्या के एक मुकदमे में तीन दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। एक आरोपी की मौत मुकदमे के दौरान हो गई थी।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, खुदागंज क्षेत्र के मोहल्ला लक्ष्मीपुर निवासी कमला देवी ने थाने में सूचना दी थी कि उनके मोहल्ले का ऋषिपाल उसके दरवाजे के सामने गालियां दे रहा था। उसने मना किया तो इस रंजिश में अगले दिन ऋषिपाल अपने भाई वीरेंद्र, रामपाल और नबी के साथ उसके घर आया और पति राम सिंह को गालियां देनी शुरू कर दीं। विरोध पर पति को लाठियों से पीटना शुरू कर दिया। बचाने आईं कमला देवी और भतीजे गंगाधर की पत्नी मुन्नी देवी को भी मारा। कमला देवी की तहरीर पर पुलिस ने सात दिसंबर 2002 को उसके मोहल्ले के वीरेंद्र, ऋषिपाल, नबी और रामपाल के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली। घायल राम सिंह की मृत्यु होने पर मुकदमा हत्या की धारा में तब्दील कर दिया गया। अदालत में मुकदमा चलने के दौरान गवाहों के बयानात और साक्ष्यों के आधार पर अपर सत्र न्यायाधीश ने ऋषिपाल, रामपाल और नबी को दोषी माना। तीनों दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। वीरेंद्र की मौत मुकदमे के दौरान हो गई थी।