शाहजहांपुर। सूखा और बाढ़ की दोहरी मार का असर कमोबेश सभी किसानों पर पड़ा लेकिन भूमिहीन किसान आर्थिक रूप से बर्बादी के मुहाने पर आ गए हैं। किसानों का कहना है कि धान की फसल से होने वाली आमदनी से उन्होंने खेत स्वामी को बटाई की रकम का भुगतान करने की योजना बनाई लेकिन अब इतनी रकम पास नहीं बची कि कर्ज उतारने के साथ घरेलू जरूरतें पूरी कर सकें। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि मौसम साफ होते ही प्रभावित क्षेत्र का व्यापक सर्वे कराकर पीड़ित किसानों को नुकसान के अनुरूप शासन से आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। हालांकि मुआवजा उसी को मिलेगा, जिसके नाम सरकारी अभिलेखों में जमीन दर्ज होगी।
किसानों की बात
दो एकड़ खेत दो हजार रुपये बीघा के हिसाब से बटाई पर लेकर धान, तिल और बाजरा की फसल की थी। शुरुआत में पानी न बरसने के कारण फसलों को बचाने के लिए कई बार पानी लगाना पड़ा, जिससे लागत काफी बढ़ गई। अब सभी फसलें पानी मे डूबी हैं। -रामनिवास, शेरपुर चुरघुटी (जलालाबाद)
हमने खेत बटाई पर लेकर धान व उर्द की फसल बोई थी। खाद, दवा (कीटनाशक) और सिंचाई पर अच्छी खासी लागत इस उम्मीद से लगाई थी कि पैदावार होने पर सारे खर्च निकल आएंगे, लेकिन अब घर में खाने तक को धान, उर्द नहीं बचेंगे। - छोटे सिंह, शेरपुर चुरघुटी (जलालाबाद)
डेढ़ एकड़ जमीन पंद्रह सौ रुपये बीघा पटके पर लेकर अच्छे क़िस्म के धान की रोपाई की थी। कुछ हिस्से में अन्य फसल भी की जिस पर दस हजार रुपये से ज्यादा लागत आ गई। किसी तरह घुमंतू पशुओं व सूखे से फसल को बचाया, लेकिन बरसात ने बरबाद कर दिया। -अतुल कुमार, खजुआहार (जलालाबाद)
दस बीघा खेत पटका (लगान) पर लेकर धान की फसल तैयार की। पंपसेट से सिंचाई करके तैयार की धान की फसल बेमौसम बारिश और तेज हवा में जमीन पर गिर गयी। अब जमीन पर पड़ी फसल बाढ़ में डूबने से पूरी तरह नष्ट हो गयी। -लोकनाथ, नई बस्ती, मिर्जापुर
रामगंगा के खादर में 11 बीघा खेत में धान और लगभग आठ बीघा उर्द, तिल बोई थी। फसलें अच्छी चली थीं, लेकिन भारी बारिश और बाद में बाढ़ ने पूरी फसलें निगल लीं। समझ में नहीं आ रहा कि गृहस्थी का खर्च किस तरह चल पाएगा। -शिवराम वर्मा, पहरुआ, मिर्जापुर