किसान के पास रुपये नहीं तो कहां से बिके माल
कृषि यंत्र, सर्राफा और रेडीमेड व्यापारी बिक्री नहीं होने से परेशान
सूखा और बारिश से तबाह हो चुके किसान को गेहूं की वर्तमान फसल बढ़िया होने की उम्मीद थी, लेकिन सर्दी कम होने से वैज्ञानिक गेहूं की फसल कम होने की आशंका जता रहे हैं, इससे किसान के चेहरे फक्क पड़ गए हैं। गन्ने का भी बकाया भुगतान नहीं मिल रहा है। ऐसे में किसान की जेब पूरी तरह से खाली है, लेकिन गेहूं की फसल में लागत की मजबूरी के चलते साहूकारों आदि से कर्ज लेकर खाद, दवाएं खरीदनी पड़ रही हैं और सिंचाई की व्यवस्था भी करनी पड़ रही है। पुवायां तहसील खेती के मामले में प्रदेश भर में अग्रणी है। किसान आधुनिक विधि से खेती करने के लिए तमाम नए तरह के कृषि यंत्र खरीदते हैं, लेकिन वर्तमान सीजन में कृषि यंत्रों के कारोबार में 50 प्रतिशत तक गिरावट आ गई है। कृषि यंत्र निर्माता हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं और मिस्त्री, श्रमिकों को भुगतान करने तक के लाले पड़े हैं। यही हाल सर्राफा बाजार और रेडीमेड बाजार का है। कृषि यंत्रों के निर्माता और विक्रेता पुवायां धीरज शर्मा (नंदा ब्रदर्स) ने कहते हैं कि किसानों को फसल का उचित मूल्य नहीं मिल रहा है। कृषि यंत्रों पर दी जाने वाली सब्सिडी भी नहीं मिल रही है। गन्ने का पुराना बकाया नहीं मिलने और नए रेट नहीं घोषित किए जाने से किसान परेशान है। कृषि प्रधान क्षेत्र होने के कारण किसान की खुशहाली से व्यापारियों की खुशहाली जुड़ी है। व्यापार में 50 प्रतिशत की गिरावट आई है। अजीत ब्रजकिशोर कुमार सर्राफ प्रतिष्ठान पुवायां पंकज सर्राफ के मुताबिक, पूरा सर्राफा व्यापार किसानों पर टिका है। किसान परेशानी के कारण गिरवी तक नहीं छुड़ा पा रहे हैं। नया माल भी नहीं बिक रहा है। ऐसे में नए जेवर गिरवी रखने और नए जेवर खरीदने के लिए रुपये कहां से लाए जाएं। सर्राफा व्यापारियों को दुकान सहित अन्य खर्चे तक निकालना मुश्किल हो रहा है। रेडीमेड वस्त्र व्यवसाई राजा मार्केट पुवायां नरेशा चौहान के मुताबिक, इस वर्ष सर्दियों में बेचा जाने वाला रेडीमेड माल गोदामों में भरा पड़ा है। रेट कम होने के बाद भी बिक्री नहीं हो रही है। इसका कारण किसान के पास रुपये नहीं होना है। बिक्री में गत वर्ष की अपेक्षा 50 प्रतिशत गिरावट है। व्यापारी परेशान है।